सुप्रीम कोर्ट का BMC कमिश्नर पर सख्त रुख, अवमानना नोटिस जारी, वेतन रोकने का आदेश
बोरीवली में BEST बस स्टेशन की आरक्षित जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने पर कार्रवाई, मुंबई महानगरपालिका पर 5 लाख रुपये का जुर्माना

मुंबई: बोरीवली में BEST बस स्टेशन के लिए आरक्षित जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करने पर शीर्ष अदालत ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) के कमिश्नर के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कमिश्नर को अवमानना का नोटिस जारी करते हुए उनके और उनके निजी स्टाफ के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। साथ ही BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 3 नवंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने BMC की अतिरिक्त समय देने की मांग खारिज कर दी। अदालत ने कमिश्नर से जवाब मांगा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की कथित जानबूझकर अवहेलना करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
अधिकारियों को जेल भेजने की चेतावनी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने BMC की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि नगर निगम के अधिकारी अदालत के आदेशों का पालन करने में रुचि क्यों नहीं दिखा रहे हैं और क्या अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अहमियत जेल भेजे जाने के बाद ही समझ आएगी।पीठ ने कहा कि अदालत के निर्देशों का उल्लंघन जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है। अतिक्रमणकारियों के साथ अधिकारियों की संभावित मिलीभगत पर भी अदालत ने सवाल उठाए।
1 दिसंबर 2026 तक वेतन पर रोक
अदालत ने BMC की 30 दिन का अतिरिक्त समय देने की मांग ठुकराते हुए कमिश्नर और उनके निजी स्टाफ का वेतन रोकने का निर्देश दिया। सुनवाई में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया कि 1 दिसंबर 2026 तक कमिश्नर को वेतन जारी नहीं किया जाएगा। अवमानना नोटिस पर फैसला होने तक वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार और नगर निगम को भी इस आदेश का पालन करने को कहा गया है। BMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.पी. भट्ट ने 30 दिन का समय देने और इस दौरान आदेश का पालन करने का आश्वासन दर्ज करने का अनुरोध किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पहले आदेश का पालन किया जाए। अदालत अब केवल आश्वासन स्वीकार नहीं करेगी। जरूरत पड़ने पर अधिकारियों को आधी रात तक काम करना चाहिए, लेकिन आदेशों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
मराठी दस्तावेजों के अनुवाद में देरी का तर्क खारिज
BMC की ओर से बताया गया कि अतिक्रमणकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे और दो बार सुनवाई भी हुई थी। कब्जाधारियों की ओर से दस्तावेज पेश किए जाने के बाद उनकी जांच और अंतिम आदेश पारित करने की प्रक्रिया लंबित है। निगम ने मराठी दस्तावेजों का अंग्रेजी अनुवाद कराने में देरी को भी कार्रवाई प्रभावित होने का कारण बताया। इस दलील पर न्यायमूर्ति बागची ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि यदि अधिकारी मराठी दस्तावेज नहीं समझ पा रहे हैं, तो प्रशासन कैसे काम कर रहा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि दस्तावेजों के अनुवाद में देरी अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने का उचित कारण नहीं हो सकती।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद बोरीवली में BEST बस स्टेशन के लिए निर्धारित जमीन पर अतिक्रमण से जुड़ा है। 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निजी डेवलपर को प्रशासनिक भवन सहित लगभग 3,400 वर्ग मीटर जमीन का खाली और शांतिपूर्ण कब्जा BMC को सौंपने का निर्देश दिया था। साथ ही निगम को बस स्टेशन का काम पूरा कर उसे चालू करने और जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया था। 13 नवंबर 2025 को अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए BMC कमिश्नर से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था। इसमें कब्जाधारियों की सूची, जारी नोटिस, उनके जवाब और किरायेदारी या मालिकाना हक के दावों से संबंधित दस्तावेजों का विवरण मांगा गया था। इसके बावजूद कार्रवाई में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर BMC ने अतिरिक्त समय मांगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 3 नवंबर 2026 को खारिज कर दिया। अब कमिश्नर को अवमानना नोटिस का जवाब देना होगा और निगम को अदालत के आदेशों का पालन करना होगा। इस कार्रवाई को सार्वजनिक जमीन और जनहित से जुड़े मामलों में न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
