छात्र प्रदर्शन हिंसा की जांच करने वाली कमेटी में बदलाव से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

HPEC सदस्यों पर उठाए सवालों को कोर्ट ने बताया ‘अटकलों और पूर्वधारणाओं’ पर आधारित; पैलेट गन, महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न और दोनों पक्षों की हिंसा की होगी जांच
नई दिल्ली। छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए गठित हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) का पुनर्गठन करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कमेटी के सदस्यों की निष्पक्षता पर उठाई गई आपत्तियों को जांच शुरू होने से पहले की गई “अटकलों और पूर्वधारणाओं” पर आधारित बताते हुए स्पष्ट किया कि समिति किसी एक पक्ष का समर्थन करने के लिए नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से अदालत की सहायता के लिए बनाई गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 10 सितंबर की सुनवाई के बाद जारी विस्तृत आदेश में यह रुख अपनाया। HPEC की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। पांच सदस्यीय समिति में पूर्व न्यायाधीशों के अलावा पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व DGP डॉ. एल.आर. बिश्नोई भी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से समिति के एक सदस्य की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए गए थे और समिति की अध्यक्षता किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश से कराने की मांग भी सामने आई थी। कोर्ट ने पुनर्गठन की मांग स्वीकार नहीं करते हुए कहा कि HPEC से निष्पक्षता, पारदर्शिता और पूर्वाग्रह रहित दृष्टिकोण के उच्च मानकों के साथ काम करने की अपेक्षा है। सुप्रीम कोर्ट ने HPEC को शुरुआती तौर पर कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को प्राथमिकता से जांचने को कहा है। इनमें पैलेट गन का इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित लक्षित हिंसा एवं उत्पीड़न, पुलिसकर्मियों को लगी चोटें तथा दोनों पक्षों की ओर से कथित अत्यधिक हिंसा और संपत्ति को हुए नुकसान की जांच शामिल है। व्यापक संवैधानिक प्रश्नों पर सुप्रीम कोर्ट स्वयं उचित चरण पर विचार करेगा।
14 वर्षीय प्रदर्शनकारी और परिवार को सुरक्षा देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन में शामिल 14 वर्षीय लड़की और उसके परिवार को कथित तौर पर मिली धमकियों को भी गंभीरता से लिया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को बच्ची और उसके परिवार के खतरे का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा कथित धमकियों और उत्पीड़न की शीघ्र जांच करने का निर्देश दिया। दिल्ली पुलिस को अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी।
संवेदनशील गवाहों की पहचान रहेगी गोपनीय
अदालत ने HPEC को संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उनकी पहचान गोपनीय रखने तथा उनके बयान और साक्ष्यों की गोपनीयता बनाए रखने का निर्देश दिया है। समिति को दस्तावेज और साक्ष्य जमा कराने के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने की अनुमति भी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सी. सोलोमन को न्याय मित्र नियुक्त किया है। HPEC से लॉजिस्टिकल और सचिवीय सहायता के लिए जल्द सदस्य सचिव नियुक्त करने तथा अपनी पहली रिपोर्ट यथाशीघ्र अदालत को सौंपने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को होगी।
