झांसी में पॉक्सो एक्ट पर विशेष विधिक जागरूकता अभियान, चार शिक्षण संस्थानों में लगे शिविर
न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा कानूनों, गुड टच-बैड टच और साइबर सुरक्षा की दी जानकारी

देवेश प्रताप सिंह राठौर
झांसी, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देश और जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष कमलेश कच्छल के मार्गदर्शन में झांसी और ग्रामीण तहसीलों में बच्चों एवं किशोरियों की सुरक्षा को लेकर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम विशेष विधिक साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पूर्णकालिक सचिव ईशा त्रिपाठी के संयोजन में जनपद मुख्यालय एवं तहसील स्तर के चार प्रमुख शिक्षण संस्थानों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। राजकीय इंटर कॉलेज, झांसी में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मोहम्मद नेयाज़ अहमद अंसारी तथा अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमित पाराशर ने विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम-2012 के प्रावधानों, पीड़ित बच्चों की पहचान की गोपनीयता और त्वरित न्याय व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार, छेड़छाड़ या मानसिक उत्पीड़न को सहन न करने और निर्भीक होकर आवाज उठाने का आह्वान किया। असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल अजय कुमार राठौर ने निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी। विपिन बिहारी इंटर कॉलेज में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमलकांत श्रीवास्तव और शरद कुमार चौधरी ने विद्यार्थियों को बाल संरक्षण कानूनों, आत्मरक्षा तथा ‘गुड टच और बैड टच’ के अंतर के बारे में जागरूक किया। असिस्टेंट एलएडीसी दीपक मणि ने पीड़ित बच्चों को न्यायालय में मिलने वाली निःशुल्क पैरवी और विधिक संरक्षण की जानकारी दी। तहसील टहरौली के आलोकनाथ इंटर कॉलेज में ग्राम न्यायालय टहरौली के न्यायाधीश श्रेयांश निगम और अपर सिविल जज (जू.डि.) प्रेरणा यादव ने पॉक्सो एक्ट के साथ बाल श्रम, बाल विवाह निषेध कानून और सोशल मीडिया के इस्तेमाल के दौरान बरती जाने वाली साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियों के बारे में बताया। वहीं, तहसील मोंठ के पं. दीनदयाल उपाध्याय मॉडल पब्लिक स्कूल, कोमरार में सिविल जज (जू.डि.) शुभम चौधरी और न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू धनकड़ ने बच्चों को उनके विधिक एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षा समाज एवं कानून की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सभी चारों शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को आपात स्थिति अथवा उत्पीड़न की स्थिति में सहायता के लिए नालसा की 24×7 राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन 15100, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, वूमेन पावर लाइन 1090 और आपातकालीन पुलिस सेवा 112 की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को विधिक जागरूकता संबंधी पम्पलेट भी वितरित किए गए। कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों, विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारियों, पराविधिक स्वयंसेवकों, विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
