
नासिक। महाराष्ट्र के नासिक जिले में आगामी नगर निगम चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। गुरुवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कई प्रमुख नेता भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम को स्थानीय राजनीति में बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर मनसे और शिवसेना (यूबीटी) के लिए। बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं में पूर्व मनसे विधायक नितिन भोसले, शिवसेना (यूबीटी) के पूर्व महापौर विनायक पांडे, मनसे से पहले महापौर रहे यतिन वाघ, कांग्रेस नेता शाहू खैरे और संजय चव्हाण शामिल हैं। इन नेताओं के बीजेपी में प्रवेश को नासिक मनपा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
दिनकर पाटिल के प्रवेश ने बढ़ाया सियासी आश्चर्य
सबसे अधिक चर्चा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राज्य महासचिव दिनकर पाटिल के बीजेपी में शामिल होने को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में इसलिए भी आश्चर्य है क्योंकि दिनकर पाटिल एक दिन पहले ही राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे और शिवसेना (यूबीटी) के संभावित गठबंधन का जश्न मनाते नजर आए थे। इसके बावजूद, उन्होंने अपने बेटे और पूर्व पार्षद पत्नी लता पाटिल के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया। इस मौके पर बीजेपी नेता और राज्य सरकार में मंत्री गिरीश महाजन भी मौजूद रहे। इस अवसर पर गिरीश महाजन ने कहा कि लोग बीजेपी की विचारधारा और नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए पार्टी से जुड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 122 सदस्यीय नासिक नगर निगम में बीजेपी 100 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता में आएगी।
बीजेपी के भीतर ही विरोध के सुर
हालांकि, इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच बीजेपी के भीतर भी असंतोष सामने आया है। नासिक मध्य की बीजेपी विधायक देवयानी फरांडे ने विनायक पांडे, यतिन वाघ और शाहू खैरे के पार्टी में प्रवेश का खुलकर विरोध किया। उनके समर्थकों और पार्टी के कुछ पुराने कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया। देवयानी फरांडे ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपना विरोध दर्ज कराते हुए लिखा- मैं आज वार्ड नंबर 13 में लोगों के प्रवेश का स्पष्ट रूप से विरोध करती हूं। मैं स्थापित लोगों के खिलाफ लड़ने वाले हिंदुत्व पार्टी के कार्यकर्ताओं का दृढ़ता से समर्थन करती हूं। चुनाव प्रमुख होने के नाते, मुझसे इस मुद्दे पर कोई सवाल नहीं पूछा गया है। जय श्रीराम। नासिक मनपा चुनाव से पहले नेताओं के इस दल-बदल और बीजेपी के भीतर उठे विरोध के स्वर ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में नासिक की राजनीति और भी अधिक दिलचस्प और टकरावपूर्ण होने वाली है।




