सेवा संकल्प अभियान: जनविश्वास ही राष्ट्र निर्माण की शक्ति

हेमेन्द्र क्षीरसागर
सेवा संकल्प अभियान भारतीय राजनीति में केवल एक संगठनात्मक अवसर नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को स्मरण करने का अवसर बन चुका है। प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक भारतीय जनता पार्टी द्वारा मनाया जाने वाला यह अभियान विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा-संकल्प के 25 वर्षों की यात्रा से भी जुड़ा है। नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में संवैधानिक दायित्व संभाला और वर्ष 2014 से देश के प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। इस दीर्घ सार्वजनिक यात्रा में गरीब, वंचित, किसान, महिला, श्रमिक, युवा और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना उनके राजनीतिक चिंतन का प्रमुख आधार रहा है।
सेवा पखवाड़ा क्यों महत्वपूर्ण?
सेवा संकल्प अभियान का मूल उद्देश्य प्रधानमंत्री के जन्मदिवस को जनसेवा से जोड़ना है। इसके अंतर्गत भाजपा कार्यकर्ता समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जाकर आशीर्वाद का दीया, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, पौधरोपण, गरीब कल्याण, जनजागरूकता और सामाजिक सहभागिता जैसी गतिविधियों में भाग लेते हैं। इसका सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि राजनीति केवल चुनाव और सत्ता प्राप्ति तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के प्रति निरंतर उत्तरदायित्व का माध्यम बने।
जनभागीदारी का अभियान
आज के समय में जब राजनीतिक दलों से जनता की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं, तब सेवा संकल्प संगठन और समाज के बीच संवाद का अवसर भी प्रदान करता है। किसी जरूरतमंद की सहायता, सार्वजनिक स्थान की स्वच्छता, रक्तदान, पौधा लगाना या स्वास्थ्य जागरूकता फैलाना। ये छोटे प्रयास मिलकर सामाजिक परिवर्तन की बड़ी ताकत बन सकते हैं। सेवा पखवाड़े की सार्थकता तभी है, जब यह केवल कार्यक्रमों और तस्वीरों तक सीमित न रहकर व्यवहार में सेवा-संस्कार का रूप ले।
25 वर्षों की यात्रा से सीख
नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की यात्रा को यदि एक शब्द में परिभाषित किया जाए तो वह है सेवा। इस अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने भी यही चुनौती है कि वे सेवा को केवल अभियान नहीं, बल्कि अपनी कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाएं। लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक संगठन की वास्तविक शक्ति उसके कार्यकर्ताओं और जनता के बीच संबंधों में निहित होती है। सेवा के माध्यम से यह संबंध अधिक आत्मीय और मजबूत बनाया जा सकता है।
संकल्प का अवसर
प्रधानमंत्री का जन जीवन यदि समाज के कमजोर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाने का माध्यम बने। कोई पौधा भविष्य की हरियाली का आधार बने। किसी मरीज को रक्त मिले। किसी जरूरतमंद को सहायता मिले और किसी युवा को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिले। तभी सेवा पखवाड़े की वास्तविक सार्थकता सिद्ध होगी। सेवा संकल्प अभियान इसलिए केवल 17 सितंबर से शुरू होने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा से राष्ट्र निर्माण की उस सोच को मजबूत करने का अवसर है, जिसमें राजनीति का अंतिम लक्ष्य समाज और राष्ट्र का कल्याण हो। 25 वर्षों के सेवा-संकल्प का संदेश स्पष्ट है। जनसेवा ही जनविश्वास का आधार और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है।
