बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’, 178 स्टार्टअप आइडिया में टॉप-25 का प्रदर्शन
कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय बोले— युवाओं को केवल रोजगार पाने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनना होगा

देवेश प्रताप सिंह राठौर
झांसी, उत्तर प्रदेश। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बुधवार को गांधी ऑडिटोरियम में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “अवसरों से भविष्य के लिए तैयार स्टार्टअप तक: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में सतत स्टार्टअप विचारों का विकास” रहा। विद्यार्थियों से प्राप्त कुल 178 नवाचार एवं स्टार्टअप विचारों में से चयनित शीर्ष 25 विचारों का क्रमवार मंचीय प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, उद्यमिता और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भविष्योपयोगी एवं टिकाऊ स्टार्टअप की सोच को प्रोत्साहित करना रहा। इसके लिए विद्यार्थियों से ऑनलाइन माध्यम से स्टार्टअप और नवाचार संबंधी विचार आमंत्रित किए गए थे। कुल 178 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनका नौ निर्धारित मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। विद्यार्थियों के नवाचारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य एवं फार्मेसी, कृषि एवं खाद्य तकनीक, प्रबंधन, कंप्यूटर विज्ञान, शिक्षा, पर्यावरण, रोजगार, ग्रामीण विकास और सामाजिक समस्याओं के समाधान से जुड़े विषय प्रमुख रहे। मूल्यांकन में ‘सॉल्वएआई’, ‘मिस पानीपुरी’, ‘कृषिटेक’, ‘होम मेडिकेशन’ और ‘लिथोस्कैन एआई’ जैसे विचार शीर्ष प्रविष्टियों में शामिल रहे। चयनित प्रविष्टियों में सर्वाधिक स्कोर 65 अंक रहा। शीर्ष-25 चयनित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की ओर से प्रशंसा-पत्र और टोकन ऑफ एप्रिसिएशन देकर सम्मानित किया जाएगा। कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल रोजगार प्राप्त करने की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार सृजक बनने की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज विद्यार्थियों को अपने विचार पहचानने, उन्हें प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और भविष्योपयोगी स्टार्टअप में विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रहा है।
आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के निदेशक प्रो. सुनील के. कबिया ने कहा कि 178 विचारों की प्राप्ति विद्यार्थियों की रचनात्मकता, नवीन सोच और नए समाधान खोजने की क्षमता को प्रदर्शित करती है। मुख्य वक्ता एवं रिवर राफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निपेंद्र भट्ट ने कहा कि सफल स्टार्टअप की शुरुआत अपने आसपास की वास्तविक समस्याओं की पहचान से होती है। विद्यार्थी यदि इन समस्याओं के व्यावहारिक, टिकाऊ और उपयोगी समाधान विकसित करें तो उन्हें प्रभावी स्टार्टअप मॉडल में बदला जा सकता है। विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि किसी स्टार्टअप की सफलता के लिए केवल अभिनव विचार पर्याप्त नहीं है, बल्कि वित्तीय व्यवहार्यता, संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन और दीर्घकालिक स्थिरता भी जरूरी है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिकांत राय ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप इकोसिस्टम और AI आधारित अवसरों से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि विचारों को केवल अवधारणा तक सीमित न रखकर उन्हें उत्पाद और विस्तार योग्य स्टार्टअप में बदलने की दिशा में काम करना चाहिए। कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों में नवाचार, नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की भावना भी विकसित करनी चाहिए। कार्यक्रम में 25वें स्थान से प्रथम स्थान तक चुने गए शीर्ष 25 नवाचार विचारों का क्रमिक प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का संचालन हिटिका यादव ने किया। इस अवसर पर हेमंत चंद्रा, शशांक, चंद्रभान प्रजापति, पर्वत, संभव, प्रथम, मनीष शॉ, जितेंद्र कुमार, साकेत कंचन, डॉ. आशु और तरुण द्विवेदी सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ ने विद्यार्थियों को ‘विचार से नवाचार और नवाचार से स्टार्टअप’ की दिशा में आगे बढ़ने का मंच प्रदान किया।
