Thursday, February 19, 2026
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व्यंग्य: तेल देखो तेल की मार देखो

मुकेश ‘कबीर’
डोनाल्ड ट्रम्प के सेकरेट्री पीटर नवारो ने कहा कि रूस के तेल का फायदा भारत के ब्राह्मण उठा रहे हैं। इस बयान ने साबित कर दिया कि बोलने के मामले मे भूरा भाई का छोटू उनसे डेढ़ परसेंट भी कम नहीं है। हालांकि भारत में इन दोनों की बातों को कोई महत्व नहीं देता क्योंकि यहाँ तो एक पहले से ही मौजूद है जो दस साल से हमें इस तरह की मनोरंजक सामग्री उपलब्ध करा रहा है। असल में भारत में इन तीनों पप्पुओं का गुरु जॉर्ज सोरोस को माना जाता है इसलिए हमारे एक मित्र का कहना है कि सोरोस ने शायद भारत वाले की स्क्रिप्ट अमेरिका वाले को दे दी इसलिए पीटर ने ब्राह्मणों को तेल मे लपेट दिया लेकिन हमें समझ नहीं आ रहा कि ब्राह्मणों का रुसी तेल से क्या लेनादेना? देसी घी की बात होती तो समझ में भी आता कि हवन,पूज,न भोजन प्रसादी के लिए चाहिए होगा लेकिन भारत के ब्राह्मण रुसी तेल सस्ता खरीदकर महंगा बेच रहे हैं यह बात सुनकर तो लगता कि पप्पू स्टाइल अब पूरी दुनिया में चल चुका है। एक बात यह भी साबित हो गई कि पीटर भारत वाला हो या अमेरिका वाला दोनों को ब्राह्मणों से खुन्नस रहती है और हमें तो ऐसा भी लगा कि बहुजन समाजवादी पार्टी को गोरा प्रवक्ता मिल गया, वैसे भी बहिन जी अकेली लगी हुई थीं, अब उन्हें भी सहारा मिल जाएगा। बुढ़ापे मे चाहिए भी एक भरोसेमंद साथी, जो उन्हें अमेरिका में मिला वरना भारत में तो बहिन जी का हाल माया मिली ना राम जैसा हो चुका था। खैर पीटर के इस बयान ने भारत की राजनीति मे हीटर जरूर लगा दिया। हमारे विपक्षी दल चकर घिन्नी हो गए उनको लगता है कि हम बेवजह अडानी को बदनाम करते रहे मुनाफा तो ब्राह्मण कमा रहें हैं, सत्ता वाले इसलिए परेशान हैं कि उन पर फिर से ब्राह्मणवादी होने का आरोप लगेगा फिर दलितों का गुस्सा झेलना पड़ेगा और दलितों को लगता है रूस ने तेल बेचने में आरक्षण के नियमों का पालन क्यों नहीं किया और हमारे अडानी यह सोचकर दुखी है कि इस साल भी दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनने का सर्टिफिकेट हासिल नहीं हो पाएगा यहां भी ब्राह्मणों ने भांजी मार दी। लेकिन सबसे ज्यादा दुखी तो हमारे बेधड़क भोपाली हैं वो कहते हैं कि हम तो तीन पीढ़ियों से तेल की लाइन में लगे हुए हैं लेकिन तेल ब्राह्मणों को मिल गया। खैर, जिस तरह हँसने वाले हंसने के बहाने ढूंढ लेते हैं, उसी तरह रोने वाले रोने के बहाने ढूंढ़ लेते हैं इसलिए कुछ कहने के बजाय हमें सिर्फ परिणाम पर ध्यान देना चाहिए कि मस्तिष्क को कष्ट दिए बिना बोलने वाले लोग हमारा उखाड़ क्या लेंगे इसलिए चुप रहकर तेल देखो और तेल की मार देखो…

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