एफडीए मंत्री की कुर्सी खतरे में, फिर भी क्यों दे रहे हैं भ्रष्ट अधिकारी को संरक्षण?
जिस भ्रष्ट अधिकारी की शिकायत विधायक राम कदम ने की, उसे ही मंत्रालय में मिली प्रतिनियुक्ति
क्या लोकप्रिय सीएम देवेंद्र फडणवीस की छवि खराब करने की हो रही साजिश?

मुंबई। महाराष्ट्र अन्न व औषध प्रशासन (एफडीए) के मुंबई मंडल में कार्यरत सहायक आयुक्त (अन्न) डॉ. भूषण मोरे की महाराष्ट्र शासन के अर्थसंकल्पीय अधिवेशन से पूर्व मंत्रालय में की गई प्रतिनियुक्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय सूत्रों और प्रशासनिक हलकों में इस नियुक्ति को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
गौरतलब है कि 16 जनवरी 2020 को डॉ. मोरे, तत्कालीन सहायक आयुक्त (अन्न), ठाणे द्वारा श्री गणेश मंगल कार्यालय, खारबाव, भिवंडी से लगभग 2 करोड़ 74 लाख 52 हजार 700 रुपये मूल्य का प्रतिबंधित गुटखा (प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ) जप्त किया गया था। आरोप है कि उक्त जप्त माल को महज 24 घंटे के भीतर नष्ट कर दिया गया, जबकि इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री का इतने कम समय में निस्तारण संभव नहीं माना जा रहा। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीर और संदिग्ध परिस्थितियों की चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला मामलों में कथित अनियमितताओं के प्रकरण प्रशासनिक अभिलेखों में दर्ज हैं। निकृष्ट दर्जे की सुपारी को नियमानुसार नष्ट न करने के आरोप भी सामने आए हैं। इस संबंध में विधायक राम कदम द्वारा 23 सितंबर 2025 को एफडीए मंत्री नरहरी जिरवाल से शिकायत की है। हालाकि सुपारी प्रकरण में दिनांक 31 जुलाई 2024 को एफडीए सह आयुक्त (विजिलेन्स) डॉ राहुल खाड़े ने तत्कालीन मंत्री धर्मरावबाबा आत्राम को सहायक आयुक्त भूषण मोरे पर भ्रष्टाचार व अनियमितता होने की रिपोर्ट भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विधायक राम कदम के पत्र के बाद एक बार फिर इस मामले में एफडीए सचिव धीरज कुमार ने भ्रष्ट अधिकारी भूषण मोरे को निलंबित करने के लिए एफडीए मंत्री कार्यालय को फ़ाइल भेजी है और कार्रवाई अभी भी लंबित है। शर्मनाक बात यह है कि जिस सहायक आयुक्त की शिकायत विधायक राम कदम ने मंत्री नरहरी जिरवाल महोदय से की, उन्ही मंत्री महोदय ने उसकी प्रतिनियुक्ति अपने ही कार्यालय (मंत्रालय) में करा दी। एफडीए मंत्री कार्यालय में एसीबी की कार्रवाई के बाद से एक तरफ जहां विपक्ष मंत्री नरहरी जिरवाल से इस्तीफे की मांग कर रहा है और फडणवीस सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है, तो दूसरी तरफ मंत्री महोदय ने एक और विवादित अधिकारी की नियुक्ति अपने कार्यालय में कर दी। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि एफडीए मंत्री नरहरी जिरवाल को भ्रष्टाचार में लिप्त मोरे की जानकारी डॉ. रामदास गाडे, जो मंत्री के निजी सचिव (पीएस) ने छिपाई, जिसके चलते डॉ. मोरे की मंत्रालय में प्रतिनियुक्ति हुई है। डॉ. गाडे का नाम हाल ही में एफडीए मंत्री कार्यालय (मंत्रालय) में हुई एसीबी की छापेमारी से जुड़े एक प्रकरण में संदिग्ध रूप से सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि गाड़े की हकालपट्टी एफडीए मंत्री कार्यालय से कर दी गई है। लेकिन जाते-जाते एक भ्रष्ट अधिकारी को मंत्रालय में इंट्री मिल गई है। यह भी कहा जा रहा है कि आगामी विधानसभा सत्र में संभावित तारांकित प्रश्न (एलएक्यू) या सूचना से बचने के उद्देश्य से यह प्रतिनियुक्ति कराई गई हो सकती है। विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ पूर्व वैमनस्य के चलते कार्रवाई प्रभावित होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। एफडीए मंत्री नरहरी जिरवाल के कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच एक विवादित अधिकारी को एफडीए मंत्री कार्यालय में प्रतिनियुक्ति को लेकर विपक्ष और प्रशासनिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस मामले में स्पष्टता और कार्रवाई नहीं की गई तो राज्य प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मंत्रालय, जहां से पूरे राज्य का संचालन होता है, वहां इस प्रकार भ्रष्ट अधिकारी की प्रतिनियुक्ति पर उठते प्रश्न सरकार की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि एफडीए मंत्री नरहरी जिरवाल और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस प्रकरण पर क्या रुख अपनाते हैं।




