यूपी में सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन के नए नियम, पुलिस को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सीधी भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों के चरित्र सत्यापन के लिए नई नीति जारी की है। इसके तहत जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) को 30 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। इसका उद्देश्य सत्यापन प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाना है।
चरित्र प्रमाण पत्र कहां बनवाएं?
सामान्य पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र संबंधित जिले की पुलिस जारी करती है। इसके लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के नागरिक सेवा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। पहचान पत्र, पते के प्रमाण और फोटो सहित आवश्यक दस्तावेज देने होते हैं। जांच के बाद डिजिटल हस्ताक्षर वाला प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। सरकारी नौकरी के लिए सत्यापन की प्रक्रिया संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी शुरू करता है, इसलिए उम्मीदवारों को भर्ती विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
पुलिस जांच और सुनवाई के नियम
नई नीति के तहत उम्मीदवार के गृह जिले और उन जिलों से रिपोर्ट मांगी जा सकती है, जहां वह पिछले पांच वर्षों में एक वर्ष से अधिक समय तक रहा हो। सामान्य मामलों में रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन किया जा सकेगा। हर मामले में घर जाकर जांच या उम्मीदवार की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। यदि रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे। सुनवाई ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से हो सकती है।
एफआईआर या विचारधारा के आधार पर नहीं होगी अयोग्यता
केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से उम्मीदवार स्वतः नौकरी के लिए अयोग्य नहीं होगा। निर्णय मामले के तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर लिया जाएगा। इसी तरह, केवल राजनीतिक विचारधारा के कारण भी किसी उम्मीदवार को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। हालांकि, हिंसक गतिविधियों के जरिए सामाजिक व्यवस्था बदलने के घोषित उद्देश्य वाले संगठनों से सक्रिय जुड़ाव के मामलों में नीति के निर्धारित प्रावधान लागू हो सकते हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों में संलिप्तता को एक समान नहीं माना जाएगा।
