महाराष्ट्र में 26 जनवरी से शुरू होंगी नई डिजिटल सरकारी सेवाएं, मुख्यमंत्री फडणवीस ने 31 दिसंबर तक सभी काम पूरे करने के दिए निर्देश
‘महाडीबीटी 2.0’, ‘मैत्री 2.0’ और ‘आपले सरकार 2.0’ के जरिए नागरिकों को मिलेंगी सुविधाएं, सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत होगी कम

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने नागरिकों को सरकारी सेवाएं अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के सभी संबंधित विभागों और महाआईटी को आपसी समन्वय से काम करते हुए ‘महाडीबीटी 2.0’, ‘मैत्री 2.0’ और ‘आपले सरकार 2.0’ से जुड़ी सभी लंबित प्रक्रियाएं 31 दिसंबर 2026 तक पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इन डिजिटल सेवा प्लेटफॉर्मों का लोकार्पण 26 जनवरी 2027 को करने का लक्ष्य रखा गया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में उनके सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर इन तीनों डिजिटल प्लेटफॉर्मों की सेवाओं के एकीकरण और सरलीकरण को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार, राज्य सेवा अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त मनुकुमार श्रीवास्तव सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में गृह, वित्त, सार्वजनिक निर्माण, ऊर्जा, राजस्व, नगर विकास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पर्यटन, उद्योग, सामाजिक न्याय, स्कूली शिक्षा, कृषि, महिला एवं बाल विकास, पशुपालन, श्रम, ओबीसी तथा खेल एवं युवा कल्याण विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ महाआईटी, मैत्री और समग्र की टीमों ने भाग लिया।
डिजिटल व्यवस्था से प्रशासनिक कामकाज का बोझ 50 प्रतिशत तक घटाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं की पूरी प्रक्रिया के लिए ‘एंड-टू-एंड’ डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इसके तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाकर नागरिकों तक सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होने पर सरकारी विभागों पर दैनिक प्रशासनिक कार्यों का बोझ लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है। साथ ही नागरिकों को छोटी-छोटी सरकारी सेवाओं के लिए कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से जाने की आवश्यकता भी काफी हद तक समाप्त होगी। मुख्यमंत्री ने विभागों को निर्देश दिए कि तकनीकी विकास के दौरान आवश्यकताओं में बार-बार बदलाव करने से बचें। महाआईटी को भी विभागों की जरूरतों के अनुसार तकनीकी सुविधाएं विकसित करने तथा आने वाली समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने को कहा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्चाधिकार समिति से किसी प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद संबंधित विभाग तीन दिनों के भीतर शासन निर्णय जारी करने की प्रक्रिया पूरी करें। सभी विभाग समयसीमा के अनुसार उलटी गणना करते हुए अपनी लंबित जिम्मेदारियां पूरी करें।
30 नवंबर तक पोर्टलों का एकीकरण, 15 दिसंबर तक प्रशिक्षण
बैठक में तय किया गया कि विभिन्न सरकारी विभागों के बाहरी पोर्टलों को 30 नवंबर 2026 तक ‘आपले सरकार’ और ‘मैत्री’ प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसी समयसीमा के भीतर महाआईटी और मैत्री को उच्चाधिकार समिति द्वारा स्वीकृत नागरिकों तथा व्यवसायों से संबंधित सरकारी सेवाओं का तकनीकी विकास और एकीकरण पूरा करना होगा।
इसके बाद 15 दिसंबर तक उपयोगकर्ता स्वीकृति परीक्षण, क्षेत्रीय परीक्षण, अधिकारियों का प्रशिक्षण, उपयोगकर्ता पुस्तिका तैयार करने और नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने से जुड़े कार्य पूरे किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता केवल तकनीकी व्यवस्था तैयार होने से नहीं मापी जाएगी, बल्कि नागरिकों को सेवाएं कितनी सरलता और प्रभावी ढंग से मिल रही हैं, यही इसकी वास्तविक कसौटी होगी।
1,222 सरकारी सेवाओं की समीक्षा, 723 सेवाओं का सरलीकरण
बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार की कुल 1,222 सेवाओं की समीक्षा की गई है, जिनमें से 723 सेवाओं का युक्तिकरण किया गया है। इस प्रक्रिया में 32 गैर-सेवाएं, 83 अप्रचलित सेवाएं, 51 तत्काल सेवाएं तथा 333 दोहराव वाली अथवा पूरक सेवाएं चिह्नित की गई हैं। उच्चाधिकार समिति की मंजूरी के बाद 46 उपविभागों की 467 सेवाओं पर आगे की प्रक्रिया शुरू है। इस पहल का उद्देश्य अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करना और नागरिकों को एक ही डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से अधिकतम सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है।
पेंशन के 8.90 लाख संभावित लाभार्थियों की पहचान
सरकार पेंशन योजनाओं के पात्र नागरिकों की पहचान के लिए डेटाबेस आधारित नई व्यवस्था विकसित करने पर भी काम कर रही है। इसके अंतर्गत राज्यभर में लगभग 8 लाख 90 हजार संभावित लाभार्थियों की पहचान की गई है। इसके अलावा खेल ई-प्रमाण प्रणाली को राज्य शिक्षा मंडल से जोड़ने की योजना है, ताकि विद्यार्थियों के सत्यापित खेल अंक परीक्षा परिणामों में स्वतः शामिल किए जा सकें। विभिन्न सरकारी महामंडलों की 130 योजनाओं को मानकीकृत आवेदन प्रक्रिया के साथ ‘महाडीबीटी 2.0’ प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।
1,700 से अधिक छात्रावासों के लिए ‘महाहोस्टेल’ प्लेटफॉर्म
राज्य के नौ विभागों के अंतर्गत संचालित 1,700 से अधिक छात्रावासों के लिए एकीकृत ‘महाहोस्टेल’ डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। इससे छात्रावासों से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सेवाओं को एक ही व्यवस्था से संचालित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही सभी सरकारी ठेकों के लिए ‘एक ठेकेदार-एक पहचान क्रमांक’ की व्यवस्था वाला एकीकृत पंजीकरण पोर्टल तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी ठेकेदारों के पंजीकरण और संबंधित प्रक्रियाओं में एकरूपता लाना है।
26 जनवरी को उत्कृष्ट सेवा केंद्रों को सम्मानित करने की योजना
बैठक में बताया गया कि राज्य में वर्तमान में 32,479 सक्रिय सेवा केंद्र हैं। इनमें से 17,517 केंद्रों ने निर्धारित मानकों को पूरा करने की रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जबकि 12,824 केंद्रों का सत्यापन पूरा हो चुका है। इन केंद्रों का वर्गीकरण आवेदन संख्या, कार्यरत दिनों, आवेदनों की स्वीकृति दर, नागरिकों की प्रतिक्रिया और सेवा गुणवत्ता के आधार पर ‘स्मार्ट’, ‘सक्षम’, ‘उदयोन्मुख’ और ‘प्रयत्नशील’ श्रेणियों में किया जा रहा है। सरकार ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले ‘स्मार्ट’ सेवा केंद्रों को 26 जनवरी 2027 को सम्मानित करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि डिजिटल सेवाओं का उद्देश्य केवल सरकारी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि नागरिकों को बिना अनावश्यक परेशानी के समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों से निर्धारित समयसीमा का पालन करते हुए डिजिटल सेवा व्यवस्था को प्रभावी बनाने का आह्वान किया।
