मुंबई में राष्ट्रीय पोषण माह: कुपोषण मुक्त समाज के लिए जनभागीदारी पर जोर
चांदिवली के असल्फा, नारायण नगर और नौपाड़ा में पोषण जागरूकता कार्यक्रम, आंगनवाड़ी सेविकाओं ने पौष्टिक आहार और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी

मुंबई। ‘पोषण का अधिकार, सुदृढ़ भारत का आधार’ की संकल्पना के साथ एकीकृत बाल विकास सेवा योजना की चांदिवली परियोजना अंतर्गत असल्फा, नारायण नगर बीट क्रमांक 5 और नौपाड़ा बीट क्रमांक 6 में नौवां राष्ट्रीय पोषण माह उत्साहपूर्वक मनाया गया। बाल विकास परियोजना अधिकारी शरद कुऱ्हाडे के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में पौष्टिक आहार, कुपोषण की रोकथाम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रति नागरिकों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। आंगनवाड़ी सेविका अश्विनी गांगरकर ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर ‘अपनी आंगनवाड़ी, अपनी जिम्मेदारी’ और ‘पौष्टिक भारत, सशक्त भारत’ की संकल्पना पर आधारित पोषण आहार प्रदर्शनी आयोजित की गई। सेविकाओं और सहायिकाओं ने पौष्टिक व्यंजन, हरी सब्जियों, दालों, अनाज और फलों के माध्यम से संतुलित भोजन का महत्व समझाया। कार्यक्रम में बालिका जन्मोत्सव, अन्नप्राशन, गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और किशोरियों से जुड़े पारंपरिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। बाल विकास परियोजना अधिकारी शरद कुऱ्हाडे ने लाभार्थियों को उपहार और ‘पहले 1000 दिन’ नामक पुस्तक प्रदान की। घाटकोपर मुंबई डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एकनाथ येवले ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और पौष्टिक आहार के संबंध में मार्गदर्शन दिया। असल्फा और नौपाड़ा की आंगनवाड़ी सेविकाओं ने अभिनव मंगळागौर कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जबकि नारायण नगर की सेविकाओं और सहायिकाओं ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पर आधारित नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिलाओं को जागरूक किया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण नौ दुर्गाओं के रूप में प्रस्तुत अन्नपूर्णा की संकल्पना रही, जिसके माध्यम से विभिन्न पोषक तत्वों का महत्व समझाया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनवाड़ी सेविकाओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। शरद कुऱ्हाडे ने कहा कि कुपोषण पर विजय प्राप्त करना केवल सरकारी विभागों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आंगनवाड़ी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पात्र लाभार्थी तक पहुंचाने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन पद्मा मलवळकर ने किया। आयोजन में मुख्य सेविका अक्षता कोरगावकर, लीना मांडेलकर, माधुरी लकडे, प्रिया मोरे और धनश्री कोडावळे सहित चांदिवली परियोजना की आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने विशेष योगदान दिया।
