मीरा-भाईंदर में उत्साह के साथ निकली ‘मराठी भाषा ग्रंथ दिंडी’
‘अभिजात मराठी भाषा सम्मान दिवस व सप्ताह’ के तहत आयोजन, विद्यार्थियों ने लेझीम की ताल पर दिया मराठी भाषा संवर्धन का संदेश

मीरा-भाईंदर। मीरा-भाईंदर महानगरपालिका की ओर से ‘अभिजात मराठी भाषा सम्मान दिवस एवं अभिजात मराठी भाषा सप्ताह’ के अवसर पर मंगलवार को ‘मराठी भाषा ग्रंथ दिंडी’ का उत्साहपूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महापौर डिंपल विनोद मेहता, महानगरपालिका आयुक्त राधाबिनोद ए. शर्मा और उपमहापौर ध्रुवकिशोर मन्साराम पाटील उपस्थित रहे। महानगर पालिका मुख्य कार्यालय से नगर भवन तक स्कूली विद्यार्थियों की भागीदारी से भव्य ग्रंथ दिंडी निकाली गई। लेझीम की ताल पर विद्यार्थियों ने मराठी भाषा के संवर्धन का संदेश देने वाली तख्तियां हाथों में लेकर उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे पूरे परिसर में मराठी भाषा और संस्कृति के प्रति गौरव का वातावरण बना रहा। ग्रंथ दिंडी के बाद नगर भवन में मराठी पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में इतिहास, विज्ञान, साहित्य और व्यक्तित्व विकास सहित विभिन्न विषयों की मराठी पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया। महापौर डिंपल विनोद मेहता, उपमहापौर ध्रुवकिशोर मन्साराम पाटील और महानगरपालिका आयुक्त राधाबिनोद ए. शर्मा ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभिन्न पुस्तकों की जानकारी ली। महापौर डिंपल विनोद मेहता ने कहा कि मराठी भाषा हमारी संस्कृति और अस्मिता की पहचान है। दैनिक व्यवहार में मराठी भाषा का अधिक से अधिक उपयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में मराठी पढ़ने की रुचि पैदा करने और मराठी साहित्य से उनका परिचय बढ़ाने के लिए इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण हैं।
उपमहापौर ध्रुवकिशोर मन्साराम पाटील ने मराठी भाषा के संवर्धन के लिए विद्यार्थियों, युवाओं और नागरिकों से आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा का गौरव बनाए रखते हुए उसके उपयोग, पठन और प्रसार को लगातार बढ़ाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। महानगरपालिका आयुक्त राधाबिनोद ए. शर्मा ने कहा कि शासकीय और दैनिक व्यवहार में मराठी भाषा का प्रभावी उपयोग बढ़ाने के साथ-साथ मराठी पुस्तकों एवं साहित्य के अध्ययन की संस्कृति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के माध्यम से मराठी भाषा और साहित्य के संवर्धन के लिए विभिन्न गतिविधियां लगातार आयोजित की जाएंगी। इस आयोजन के माध्यम से मराठी भाषा, साहित्य, संस्कृति और पठन परंपरा को और समृद्ध करने का संदेश दिया गया।
