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आजाद मैदान की अनुमति नहीं मिली तो भड़के मनोज जरांगे, बोले- 29 सितंबर को मुंबई जरूर आएंगे

सरकार पर ‘तानाशाही और गुंडागर्दी’ का लगाया आरोप; कहा- अदालत की सभी शर्तें मानेंगे, लेकिन आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे

मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई के आजाद मैदान में प्रस्तावित आंदोलन के लिए पुलिस की अनुमति नहीं मिलने पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने रविवार को साफ कहा कि अनुमति मिले या न मिले, वे अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और 29 सितंबर को मुंबई पहुंचेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान अदालत की ओर से तय सभी शर्तों और निर्देशों का पालन किया जाएगा। जरांगे ने पुलिस के फैसले को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आंदोलन की अनुमति नहीं देना ‘नफरत’ से प्रेरित फैसला है। उन्होंने सरकार पर ‘तानाशाही और गुंडागर्दी’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को रोकने की कोशिश की गई तो वे अपना अनशन और कठोर कर देंगे। जरांगे ने चेतावनी दी कि वे शनिवार से पानी, दवा और उपचार तक लेना बंद करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा- मैं आपके सामने घुटने नहीं टेकूंगा और न ही झुकूंगा। मैं डटकर खड़े रहने और मौत का सामना करने के लिए तैयार हूं, लेकिन अड़ियल सरकार के सामने नहीं झुकूंगा। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन संविधान के दायरे में है और वे न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं। जरांगे के मुताबिक यदि अदालत कोई निर्देश देती है तो उसका पालन किया जाएगा, लेकिन सरकार द्वारा नियमों को कथित रूप से चुनिंदा और मनमाने तरीके से लागू करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गणेशोत्सव का हवाला देकर पुलिस के फैसले पर सवाल
जरांगे ने गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देकर अनुमति नहीं दिए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष भी गणेशोत्सव के दौरान उनके समर्थकों ने मुंबई में आंदोलन किया था, लेकिन किसी तरह की शांति व्यवस्था भंग नहीं हुई थी। ऐसे में इस बार कानून-व्यवस्था को आधार बनाकर अनुमति रोकने का औचित्य समझ से परे है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित आंदोलन तय कार्यक्रम के अनुसार होगा और आगे की कानूनी रणनीति उनके वकील तय करेंगे। जरूरत पड़ने पर मुंबई पुलिस कमिश्नर से भी संपर्क किया जाएगा।
फडणवीस पर लगाए गंभीर आरोप
जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार राज्य को अस्थिर करने और विभिन्न समुदायों के बीच विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दलित, मुस्लिम, आदिवासी, बंजारा, धनगर और मराठा समुदायों के साथ किसानों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार इन वर्गों के हितों के खिलाफ काम कर रही है। जरांगे ने कहा, “हम 29 सितंबर को मुंबई पहुंचेंगे और अदालत की सभी शर्तों का पालन करते हुए आंदोलन करेंगे। हमने शांति भंग नहीं की है और न ही करेंगे।” उन्होंने दावा किया कि न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए किए जाने वाले शांतिपूर्ण आंदोलन को भी यदि रोका गया तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। साथ ही आंदोलन की अनुमति नहीं मिलने के कारण किसी तरह की अस्थिरता पैदा होने की स्थिति में भी सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी।

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