
मुंबई। मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिती योजना (CMEGP) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार को रोजगार सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता मिली है। गुरुवार को उद्योग मंत्री डॉ. उदय सामंत ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उपमुख्यमंत्री अजित पवार के मार्गदर्शन में योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। उद्योग संचालनालय के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के लिए 30 हजार आवेदनों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें से 25,587 आवेदनों को बैंकों ने मंजूरी दी है, जिससे 85.29 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ है। अब तक 6,193 प्रकरणों में वास्तविक ऋण वितरण किया जा चुका है, जिसके तहत 21,356.98 लाख रुपये की राशि युवा उद्यमियों तक पहुंची है। शेष मामलों में ऋण वितरण की प्रक्रिया जारी है। जिलों के प्रदर्शन की बात करें तो सांगली राज्य में अव्वल रहा, जबकि कोल्हापुर, हिंगोली, रत्नागिरी, धाराशिव, लातूर, अमरावती, गडचिरोली, जळगाव और वाशीम जिलों ने 100 प्रतिशत से अधिक लक्ष्य हासिल कर उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्ज किया है। यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन बढ़ रहा है, ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है तथा कौशल आधारित व्यवसायों को प्रोत्साहन मिल रहा है। इसके परिणामस्वरूप पलायन में कमी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। गडचिरोली जैसे नक्सल प्रभावित जिले में भी इस योजना के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। यह जिला अब ‘स्टील हब’ के रूप में उभर रहा है और यहां के युवाओं में उद्यमिता की दिशा में उल्लेखनीय रुझान दिखाई दे रहा है।उद्योग मंत्री डॉ. उदय सामंत ने कहा कि यह योजना युवाओं के लिए परिवर्तन का बड़ा अवसर साबित हो रही है और भविष्य में इसे और व्यापक स्तर पर लागू कर हर इच्छुक युवक तक उद्योग की सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को मजबूती मिल रही है और ‘आत्मनिर्भर महाराष्ट्र’ की दिशा में राज्य ने एक मजबूत कदम उठाया है।




