FDA की बड़ी कार्रवाई: सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज के पुणे स्थित थोक दवा बिक्री लाइसेंस रद्द

मुंबई हाई कोर्ट के निर्देश के बाद नए सिरे से पूरी हुई प्रक्रिया, ‘Reactin Plus’ की मिसब्रैंडिंग सहित दवाओं के भंडारण और रिकॉर्ड में मिलीं कई खामियां

मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषध प्रशासन (FDA) ने आयुक्त तुकाराम मुंढे के मार्गदर्शन में बड़ी कार्रवाई करते हुए सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के वडकी, पुणे स्थित CFA के थोक दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया है। सहायक आयुक्त (औषध), परिमंडल-3 तथा लाइसेंसिंग प्राधिकारी, FDA पुणे ने 1 अक्टूबर 2026 को यह आदेश पारित किया। FDA के मुताबिक मामला मुंबई हाई कोर्ट में दायर Writ Petition No. 11376/2026 से भी जुड़ा था। हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए विभाग ने अपनी पूर्व कार्रवाई वापस लेकर पूरी प्रक्रिया नए सिरे से की। इसके तहत 4 सितंबर 2026 को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कंपनी ने 11 सितंबर को लिखित जवाब दिया और 21 सितंबर को उसे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। कंपनी के लिखित जवाब, सुनवाई में रखे गए पक्ष, निरीक्षण के निष्कर्ष, उपलब्ध अभिलेखों और लागू कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद लाइसेंसिंग प्राधिकारी ने लाइसेंस रद्द करने का आदेश पारित किया। FDA ने स्पष्ट किया है कि यह पूर्व कार्रवाई की महज पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पूरी प्रक्रिया नए सिरे से पूरी करने के बाद लिया गया स्वतंत्र नियामक निर्णय है।
‘Reactin Plus’ को लेकर मिसब्रैंडिंग का मामला
FDA के अनुसार वडकी स्थित गोदाम के निरीक्षण में ‘Reactin Plus’ (Schedule H) दवा का स्टॉक मिला। इसके पैक पर Analgesic & Anti-inflammatory के साथ सिरदर्द, मांसपेशियों के दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच के कारण होने वाले दर्द, बदन दर्द और दांत दर्द से जल्द राहत जैसे दावे किए गए थे। इसके अलावा कार्टन पर मानव आकृति के माध्यम से मांसपेशियों के दर्द में राहत दर्शाई गई थी। FDA के मुताबिक दवा की पैकेजिंग पर किए गए दावों, लिखित सामग्री और चित्रण में लागू वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन नहीं पाया गया। इसके आधार पर Drugs and Cosmetics Act, 1940 के तहत मिसब्रैंडिंग का मुद्दा सामने आया और नियमानुसार कार्रवाई की गई। लाइसेंसिंग प्राधिकारी ने दवा को बाजार में लाने वाले Marketer की कानूनी जिम्मेदारी पर भी विचार किया। आदेश में निष्कर्ष दर्ज किया गया कि केवल निर्माता की जिम्मेदारी बताकर संबंधित प्रतिष्ठान मार्केटर के रूप में अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकता।
गोदाम में भी मिलीं कई खामियां
निरीक्षण के दौरान FDA ने गोदाम के भंडारण और प्रबंधन से संबंधित कई कमियां दर्ज कीं। इनमें नियमानुसार आवश्यक Form 35 निरीक्षण पुस्तिका उपलब्ध नहीं होना, पर्याप्त पैलेट और रैक नहीं होने के कारण दवाओं के बॉक्स सीधे जमीन पर रखना, दवाओं के स्टॉक पर धूल और साफ-सफाई में कमी शामिल है। इसके अलावा एक्सपायर हो चुकी दवाओं के लिए अलग क्षेत्र में ‘Expiry–Not for Sale’ का स्पष्ट बोर्ड नहीं मिला। ऐसी दवाओं के निपटान से संबंधित आवश्यक SOP और रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं पाए गए। खरीद बिलों में आवश्यक क्रमांक, बिक्री बिलों की डुप्लीकेट प्रतियों पर सक्षम व्यक्ति के हस्ताक्षर और अन्य रिकॉर्ड से संबंधित कमियां भी दर्ज की गईं। FDA के मुताबिक कम्प्यूटरीकृत/SAP रिकॉर्ड और गोदाम में वास्तव में उपलब्ध दवा स्टॉक के बीच अंतर भी पाया गया, जिसमें एंटीबायोटिक दवाएं भी शामिल थीं।
कंपनी का जवाब सुनने के बाद लिया फैसला
कंपनी ने लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान विभिन्न स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए। लाइसेंसिंग प्राधिकारी ने प्रत्येक मुद्दे पर विचार किया। हालांकि आदेश में कहा गया कि केवल SAP या अन्य कम्प्यूटरीकृत प्रणाली में रिकॉर्ड रखने से कोई प्रतिष्ठान वैधानिक अभिलेख, वास्तविक स्टॉक, दवाओं के सुरक्षित भंडारण, स्वच्छता और निरीक्षण के लिए आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित कानूनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाता। FDA ने कहा कि औषधियों की बिक्री और वितरण श्रृंखला में काम करने वाले प्रत्येक लाइसेंसधारी प्रतिष्ठान के लिए कानून के तहत निर्धारित जिम्मेदारियों का वास्तविक रूप से पालन करना आवश्यक है। FDA ने अपने बयान में कहा- अन्न व औषध प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि दवाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता और औषधि आपूर्ति श्रृंखला में वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करना है। प्रशासन के मुताबिक इस मामले में मुंबई हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों, पारदर्शिता, सुनवाई का अवसर और कारणयुक्त निर्णय जैसी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। FDA ने कहा है कि महाराष्ट्र में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आगे भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

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