बुंदेलखंड प्रवास पर महंत राजूदास महाराज, धार्मिक स्थलों पर किए दर्शन-पूजन
जालौन से भांडेर, दतिया, झांसी और ओरछा तक धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रमों में हुए शामिल, समाजसेवा को बताया ‘नर सेवा-नारायण सेवा’

देवेश प्रताप सिंह राठौर
झांसी, उत्तर प्रदेश। श्रीहनुमानगढ़ी अयोध्या के श्री श्री 1008 महंत राजूदास जी महाराज इन दिनों धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रवास पर बुंदेलखंड पहुंचे। मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के यहां आयोजित गणेश उत्सव में शामिल होने के बाद महंत राजूदास महाराज जालौन जिले के ग्राम पचोखरा पहुंचे। यहां गोलोकवासी संत श्री राजेश्वरानंद जी महाराज (राजेश रामायणी जी) के 72वें प्रकटोत्सव पर आयोजित कथा उत्सव एवं भजन संध्या में उन्होंने सहभागिता की। इसके बाद महंत राजूदास महाराज ने भांडेर स्थित रामगढ़ वाली माता के दरबार में विधिवत दर्शन-पूजन किया। उन्होंने खेड़ापति हनुमान जी के चरणों में भी माथा टेककर क्षेत्र की सुख-शांति और जनकल्याण की कामना की। इसके उपरांत वे दतिया स्थित मां पीतांबरा के दरबार पहुंचे और विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। झांसी पहुंचने पर महंत राजूदास महाराज ने समाजसेवी डॉ. संदीप सरावगी के कार्यालय का दौरा किया, जहां उनका आत्मीय स्वागत किया गया। इस दौरान धार्मिक और सामाजिक विषयों पर चर्चा हुई। महंत राजूदास महाराज ने संघर्ष सेवा समिति के माध्यम से किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में समाजसेवा को ‘नर सेवा-नारायण सेवा’ के रूप में देखा गया है। व्यक्ति जब अपने सामर्थ्य और संसाधनों को जरूरतमंदों के कल्याण के लिए समर्पित करता है तो वह ईश्वर की सेवा करता है। उन्होंने कहा कि धन, पद और प्रतिष्ठा तभी सार्थक हैं, जब उनका उपयोग समाज और मानवता के हित में किया जाए। बुंदेलखंड संतों, वीरों और सेवाभावी लोगों की धरती रही है तथा यहां सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाना पुण्य का कार्य है। डॉ. संदीप सरावगी ने महंत राजूदास महाराज का आशीर्वाद लेते हुए कहा कि संतों का सानिध्य और आशीर्वाद जीवन को सही दिशा देता है। उन्होंने कहा कि संघर्ष सेवा समिति का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सहायता और सेवा पहुंचाना है। इसके बाद महंत राजूदास महाराज ने ओरछा में श्री रामराजा सरकार के दर्शन-पूजन किए। उन्होंने राष्ट्र एवं समाज के कल्याण और जन-जन में सद्भाव की कामना की। धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के बाद महंत राजूदास महाराज गोरखपुर के लिए रवाना हुए, जहां उनका श्री गोरक्षनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन और मुख्यमंत्री से भेंट का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
