भगवान महावीर का अहिंसा और क्षमा का संदेश आज पूरी मानवता के लिए प्रासंगिक: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा
भारत जैन महामंडल के सामूहिक क्षमापना एवं विश्व मैत्री दिवस समारोह में राज्यपाल का आह्वान, जैन समाज रत्न पुरस्कार से चार हस्तियां सम्मानित

मुंबई। भगवान महावीर द्वारा दिए गए सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य के संदेश केवल धार्मिक सिद्धांत नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और मानवीय समाज के निर्माण का आधार हैं। आज जब दुनिया संघर्ष, युद्ध, असहिष्णुता और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब भगवान महावीर का अहिंसा, क्षमा और मैत्री का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो गया है। क्षमापना और विश्व मैत्री का संदेश किसी एक धर्म या समाज तक सीमित न रहकर पूरी मानवता का उत्सव बनना चाहिए। यह बात राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कही। रविवार को राज्यपाल घाटकोपर (पूर्व) स्थित आराध्य भक्ति पार्क डोम में भारत जैन महामंडल द्वारा आयोजित सामूहिक क्षमापना, विश्व मैत्री दिवस एवं जैन समाज रत्न अलंकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि जैन दर्शन का अनेकांतवाद हमें सिखाता है कि सत्य के अनेक पहलू हो सकते हैं। दूसरों के दृष्टिकोण को समझना, मतभेदों का सम्मान करना और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। क्षमापना पर्व आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और संबंधों को बेहतर बनाने का अवसर है। अपनी गलती स्वीकार कर दूसरों से क्षमा मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ‘क्षमा वीरस्य भूषणम्’ की उक्ति क्षमा के इसी महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में मैत्री की भावना केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि समस्त जीव-जगत के प्रति करुणा, मैत्री और कल्याण की भावना को बढ़ावा देती है। प्रत्येक जीव को अपने समान समझने से हिंसा, शोषण और द्वेष से दूर रहा जा सकता है। दैनिक जीवन में क्षमा, करुणा और मैत्री को अपनाने से सामाजिक संघर्ष और कटुता को कम करने में मदद मिल सकती है। राज्यपाल ने भगवान महावीर की अहिंसा की परंपरा और महात्मा गांधी के विचारों के संबंध का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी के आध्यात्मिक मार्गदर्शक श्रीमद् राजचंद्रजी ने उनके विचारों को महत्वपूर्ण दिशा दी। भगवान महावीर की अहिंसा की परंपरा और श्रीमद् राजचंद्रजी के आध्यात्मिक मार्गदर्शन ने गांधीजी के नैतिक चिंतन को समृद्ध किया। उन्होंने इसे भारत की महान सांस्कृतिक और सभ्यतागत परंपरा बताया।
भारत जैन महामंडल की 126 वर्षों की यात्रा की सराहना
राज्यपाल ने भारत जैन महामंडल की 126 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का उल्लेख करते हुए जैन धर्म के सिद्धांतों, आध्यात्मिक मूल्यों, सामाजिक एकता और मानव सेवा की भावना को आगे बढ़ाने में संस्था के योगदान की सराहना की। उन्होंने इस आयोजन के लिए भारत जैन महामंडल को शुभकामनाएं भी दीं।
सरकारी योजनाओं में भागीदारी बढ़ाए जैन समाज: मंगलप्रभात लोढा
इस अवसर पर कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने कहा कि जैन समाज के अनेक लोग अलग-अलग क्षेत्रों में सेवा कार्य कर रहे हैं। अब आवश्यकता है कि समाज किसी सामाजिक अभियान को सामूहिक रूप से अपनाकर आगे बढ़े।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना, तालाबों की सफाई अथवा केंद्र और राज्य सरकार तथा महानगरपालिका की किसी योजना के क्रियान्वयन में पूरा जैन समाज भागीदारी करे तो सरकार और समाज के बीच समन्वय और मजबूत होगा।
लोढा ने सूखे की परिस्थितियों में भी जैन समाज से सेवाभाव के साथ आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर नागरिकों को पीने के पानी, खेती के लिए पानी तथा पशुधन के लिए चारे और पानी की आवश्यकता है। भगवान महावीर के अहिंसा के संदेश को मानने वाले समाज को ऐसे संकट के समय सरकार के साथ मिलकर सेवा कार्यों में आगे आना चाहिए।
चार हस्तियों को ‘जैन समाज रत्न’ पुरस्कार
समाजसेवा, उद्योग और जनकल्याण के क्षेत्र में योगदान के लिए राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा के हाथों विधायक पराग शाह, सुखराज नाहर, कैलाशचंद जैन और सुरेश गोयल को ‘जैन समाज रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने सभी सम्मानित हस्तियों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि उनके कार्यों से अन्य लोगों को भी समाजसेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्रम में मुंबई की महापौर रितू तावडे, विधायक पराग शाह, भारत जैन महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ख्यालीलाल तातेड, शिवलाल पोखरणा, जैन मुनि मुनिराज मुक्त निलय विजय, आचार्य साध्वी श्री योगक्षेम प्रभा, राष्ट्रसंत गुरुदेव श्री नम्रमुनि सहित विभिन्न जैन संप्रदायों के आचार्य, संत, मुनि और साध्वी उपस्थित रहे। भारत जैन महामंडल के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष भुपेश कोठारी ने उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
