सरकारी सेवाओं में AI का बढ़ेगा इस्तेमाल: एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रही महाराष्ट्र सरकार
‘महा आईडी’ से एक ही लॉगिन पर सेवाएं देने की तैयारी, किसानों के लिए ‘महाविस्तार’ से मौसम, फसल और बाजारभाव की जानकारी

मुंबई। नागरिकों को सरकारी सेवाएं अधिक आसान, तेज और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने के लिए महाराष्ट्र सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दे रही है। एकीकृत डिजिटल सेवा प्रणाली और कृषि संबंधी स्मार्ट मार्गदर्शन के माध्यम से नागरिक-केंद्रित प्रशासन को नई दिशा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। शुक्रवार को मंत्रालय में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की महाराष्ट्र क्षेत्रीय शाखा की ओर से ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में नागरिक सेवाएं’ विषय पर ‘प्रिल्यूड परिषद 2026’ का आयोजन किया गया। परिषद में प्रशासनिक कामकाज में AI के इस्तेमाल, सरकारी योजनाओं की सुलभता और तकनीक आधारित सेवा वितरण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। परिषद की अध्यक्षता भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की महाराष्ट्र क्षेत्रीय शाखा के अध्यक्ष एवं राज्य के पूर्व मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय ने की। इसमें मानद सचिव डॉ. विजय सतबीरसिंग, मानद कोषाध्यक्ष विकास देवधर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग की आयुक्त भुवनेश्वरी एस., राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अमोद सूर्यवंशी और नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना की परियोजना निदेशक मीनल करनवाल ने भाग लिया। स्वाधीन क्षत्रिय ने कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल AI के सैद्धांतिक पहलुओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि प्रशासनिक कामकाज में इसका वास्तविक उपयोग कर नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के तरीके तलाशना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग की आयुक्त भुवनेश्वरी एस. ने बताया कि नागरिकों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं के लिए कई वेबसाइटों पर पंजीकरण और बार-बार दस्तावेज जमा करने की परेशानी से बचाने के लिए एकीकृत डिजिटल सेवा प्रणाली विकसित की जा रही है। इसके तहत ‘महा आईडी’ के माध्यम से एक ही प्रवेश व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। भविष्य में नागरिक अपनी प्राकृतिक भाषा में संवाद कर सरकारी सेवाओं और प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन कर सकें, इस दिशा में भी काम किया जा रहा है। पात्र नागरिकों को योजनाओं और प्रमाणपत्रों का लाभ अधिक तेजी से तथा जहां संभव हो स्वचालित तरीके से उपलब्ध कराने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। कृषि क्षेत्र में AI के इस्तेमाल पर मीनल करनवाल ने बताया कि ‘महाविस्तार’ प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को मौसम पूर्वानुमान, बुवाई, फसल प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण, बाजार भाव और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इस प्लेटफॉर्म पर किसान अपनी फसल और बुवाई के समय के अनुसार सलाह प्राप्त कर सकते हैं। अतिवृष्टि, लू और बिजली गिरने जैसे खतरों के संबंध में भी अलर्ट दिए जाते हैं। AI आधारित संवाद सुविधा के जरिए किसान सिंचाई, खाद के उपयोग और फसल संरक्षण से जुड़े सवाल पूछकर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अमोद सूर्यवंशी ने बताया कि सरकारी कामकाज में सुरक्षित तरीके से AI का उपयोग करने के लिए ‘महा AI’ प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इसका इस्तेमाल अधिकारी और कर्मचारी पत्र तैयार करने, दस्तावेजों का सारांश बनाने, सूचना के विश्लेषण और विभिन्न भाषाओं में अनुवाद जैसे कार्यों में कर सकेंगे। सरकारी योजनाओं में लाभार्थियों के आवेदन में दोहरी प्रविष्टियां खोजने, तस्वीरों तथा अन्य जानकारी में समानता की पहचान करने और संदिग्ध जानकारी मिलने पर अलर्ट देने के लिए भी AI के इस्तेमाल पर काम किया जा रहा है। इससे संभावित दोहरे लाभ को रोकने और सरकारी खर्च में बचत की उम्मीद है। परिषद में इस बात पर भी जोर दिया गया कि AI का इस्तेमाल करते समय नागरिकों का विश्वास, डेटा सुरक्षा, सेवाओं की विश्वसनीयता और समावेशिता को प्राथमिकता दी जाए, ताकि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों, विधि महाविद्यालय के विद्यार्थियों और अन्य आमंत्रितों ने भी भाग लिया तथा विशेषज्ञों ने उनकी शंकाओं का समाधान किया।
