लोकतंत्र में अहंकार और ‘अंगद के पैर’ का भ्रम जनता तोड़ना जानती है: अमित तिवारी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर अधिवक्ता एवं समाजसेवक अमित तिवारी की प्रतिक्रिया, बोले- कोई भी सरकार जनता से बड़ी नहीं

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उत्तर प्रदेश सरकार के स्थायित्व को लेकर दिए गए बयान—‘यह सरकार अंगद का पैर है, इसे कोई हिला नहीं सकता’—पर अधिवक्ता एवं समाजसेवक अमित तिवारी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस बयान को सत्ता के अहंकार और अति-आत्मविश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में कोई भी सरकार अजेय नहीं होती। जनता जिसे सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाती है, वही अपने मताधिकार से उसे सत्ता से बाहर भी कर सकती है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को अपनी भाषा और बयानों में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए।
सत्ता का अहंकार लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं
अमित तिवारी ने कहा कि राजनीति में कोई भी कुर्सी या सरकार ‘अंगद का पैर’ नहीं होती। भारतीय लोकतंत्र का इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्ताधारी दलों ने खुद को अजेय समझा है, तब-तब जनता ने अपने फैसले से उनके अहंकार को जवाब दिया है। सत्ता में बने रहने का भरोसा जनता के विश्वास पर निर्भर करता है, न कि किसी राजनीतिक दावे पर।
चुनिंदा पूंजीपतियों के हित में नीतियां बनाने का आरोप
सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए तिवारी ने आरोप लगाया कि देश और समाज के व्यापक हितों के बजाय कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान, नौजवान, मजदूर, व्यापारी और आम नागरिक महंगाई, बेरोजगारी तथा कानून-व्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। जनता की गाढ़ी कमाई और देश की संपत्तियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता आम नागरिकों का कल्याण और रोजगार के अवसर बढ़ाना होना चाहिए।
जनता का विश्वास ही सत्ता की असली ताकत
अमित तिवारी ने सरकार को अपनी नीतियों और कार्यशैली की समीक्षा करने की सलाह देते हुए कहा कि सत्ता का अहंकार छोड़कर आम आदमी, किसान और बेरोजगार युवाओं की समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षाओं की अनदेखी किसी भी सरकार के लिए भारी पड़ सकती है। लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है और उसका फैसला सर्वोपरि होता है। कोई भी सरकार स्थायी या अजेय नहीं है, क्योंकि सत्ता की असली ताकत जनता का विश्वास है।

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