Thursday, February 5, 2026
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गुरु तेग बहादुर साहिब का बलिदान मानवता और धर्म की रक्षा के लिए था: मुख्यमंत्री फडणवीस

‘हिंद-दी-चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी समागम कार्यक्रम में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति

नांदेड। ‘हिंद-दी-चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का बलिदान केवल सिख धर्म के लिए नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए था। उनका सर्वोच्च त्याग आज भी हमें निर्भीक होकर अन्याय के विरुद्ध खड़े रहने की प्रेरणा देता है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने उनके विचारों और इतिहास को जनता तक पहुँचाने का निर्णय लिया है, रविवार को यह प्रतिपादन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। नांदेड के मोदी मैदान में आयोजित श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी समागम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब का बलिदान देश की संस्कृति, सभ्यता और सभी धर्मों की रक्षा के लिए था। उनके पराक्रम, शौर्य और सर्वोच्च त्याग को नमन करने के लिए लाखों श्रद्धालु नांदेड की ऐतिहासिक भूमि पर एकत्र हुए हैं। उनके बलिदान से पूरे देश में धर्म, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष की नई चेतना जागृत हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह शहीदी समागम केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि गुरु तेग बहादुर साहिब का गौरवशाली इतिहास प्रत्येक गाँव, वाड़ी और बस्ती तक पहुँचाने का व्यापक अभियान है। साथ ही राज्य सरकार ने सिख गुरुओं के इतिहास को विद्यार्थियों तक पहुँचाने का दायित्व भी अपने हाथ में लिया है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इस विरासत से परिचित हो सकें। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री कोनिडेला पवन कल्याण, राज्य के मंत्री गिरीश महाजन, पंकजा मुंडे, बाबासाहेब पाटील, पालकमंत्री अतुल सावे, दिल्ली सरकार के मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा, पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद अशोक चव्हाण सहित अनेक सांसद, विधायक, वरिष्ठ अधिकारी और धार्मिक-सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित थे। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब का बलिदान किसी एक धर्म तक सीमित नहीं था, बल्कि सम्पूर्ण मानव सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए था। अत्याचारी शासकों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध उन्होंने विचार-स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अंधविश्वास और कुप्रथाओं के विरुद्ध जनजागरण किया तथा धर्मशालाओं, कुओं और जनकल्याणकारी कार्यों के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने मराठी में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए महाराष्ट्र में पुनः आने की खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब के बलिदान की स्मृति में आयोजित यह समागम अविस्मरणीय है। युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने और अखंडता बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज, संत तुकाराम, संत ज्ञानेश्वर, महात्मा फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की परंपरा का उल्लेख करते हुए महाराष्ट्र की सामाजिक समरसता की विरासत को रेखांकित किया। दिल्ली सरकार के मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि नांदेड की ऐतिहासिक भूमि पर इस भव्य समागम का आयोजन विविध समाजों को एक साथ लाने वाला सिद्ध हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को साकार करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरु तेग बहादुर साहिब का इतिहास आम नागरिकों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
संत ज्ञानी हरनाम सिंह ने कहा कि संत नामदेव ने महाराष्ट्र और पंजाब को जोड़ने का कार्य किया, जिसे आगे चलकर श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज ने और सुदृढ़ किया। जब-जब देश पर संकट आया, महाराष्ट्र और पंजाब ने एक साथ शौर्य का परिचय दिया। उन्होंने गुरु तेग बहादुर साहिब के इतिहास को विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्णय की सराहना की। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के दर्शन किए और पंच प्यारे का सम्मान किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना अखिल भारतीय धर्म जागरण समिति के प्रमुख शरदराव ढोले ने रखी, जबकि आभार प्रदर्शन शहीदी समागम के राज्य समन्वयक रामेश्वर नाईक ने किया।

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