अंग्रेजी शिक्षा के भविष्य पर पुणे में होगा वैश्विक मंथन
ईएलटीएआई का 20वां अंतरराष्ट्रीय एवं 56वां वार्षिक सम्मेलन 7 से 10 अक्टूबर तक; एआई, एनईपी-2020 और बदलती शिक्षण पद्धतियों पर होगी चर्चा

पुणे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के शिक्षा क्षेत्र पर बढ़ते प्रभाव, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020, बहुभाषी शिक्षा और बदलती शिक्षण पद्धतियों की पृष्ठभूमि में अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य शिक्षा के भविष्य पर पुणे में वैश्विक स्तर पर मंथन होगा। इंडियन इंग्लिश लैंग्वेज टीचर्स एसोसिएशन (ELTAI) और एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी (MIT-ADT) यूनिवर्सिटी, लोणी-कालभोर, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में ELTAI का 20वां अंतरराष्ट्रीय एवं 56वां वार्षिक सम्मेलन 7 से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। एमआईटी-एडीटी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज और स्कूल ऑफ होलिस्टिक डेवलपमेंट की मेजबानी में होने वाले इस चार दिवसीय सम्मेलन में देशभर से करीब 1,000 अंग्रेजी शिक्षक एवं प्रतिनिधि तथा नेपाल, बांग्लादेश, इराक, उज्बेकिस्तान, मलेशिया और थाईलैंड सहित विभिन्न देशों के 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विद्वान भाग लेंगे। ‘English on the Edge: Survive? Evolve? Thrive?’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में अंग्रेजी शिक्षा के बदलते स्वरूप और भविष्य की चुनौतियों पर विभिन्न सत्रों में चर्चा होगी। सम्मेलन का उद्घाटन महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील, ब्रिटिश काउंसिल के डिप्टी डायरेक्टर शैनन वेस्ट, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के दक्षिण एशिया निदेशक टी.के. अरुणाचलम, इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के कुलपति प्रो. डॉ. एन. नागराजू, एमआईटी-एडीटी यूनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष प्रो. डॉ. मंगेश कराड और कुलपति प्रो. डॉ. राजेश एस. की उपस्थिति में होगा। सम्मेलन के समापन समारोह में केंद्रीय सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल उपस्थित रहेंगे। यह जानकारी यूनिवर्सिटी की प्रोवोस्ट प्रो. डॉ. सायली गणकर ने आयोजित पत्रकार परिषद में दी। जनरेटिव एआई के कारण लेखन, अनुवाद, पठन, मूल्यांकन और अध्यापन की पद्धतियों में तेजी से बदलाव हो रहा है। वहीं उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में बदलाव, बहुभाषी कक्षाएं, तकनीक का बढ़ता उपयोग और शिक्षकों से जुड़ी नई अपेक्षाओं के कारण अंग्रेजी शिक्षा के सामने नई चुनौतियां भी उभर रही हैं। ऐसे में तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बिठाते हुए मानवीय रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन और संवाद कौशल का महत्व कैसे बनाए रखा जाए, इस पर सम्मेलन में विचार-विमर्श होगा, डॉ. गणकर ने बताया। एमआईटी-एडीटी यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. महेश चोपड़े ने कहा कि दुनिया भर के विद्वानों को एक मंच पर लाने से शैक्षणिक नीति और वास्तविक अध्यापन के बीच की कड़ी मजबूत होगी। भारतीय और वैश्विक शिक्षा व्यवस्था के लिए यह चर्चा महत्वपूर्ण है। स्कूल ऑफ होलिस्टिक डेवलपमेंट के निदेशक एवं स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज के डीन डॉ. अतुल पाटील ने कहा कि जब एआई पढ़, लिख और अनुवाद करने के साथ अध्यापन की नकल भी कर सकता है, तब अंग्रेजी शिक्षा में मनुष्य के रूप में हमारी विशिष्टता क्या होगी, यह एक मूलभूत प्रश्न है। बदलती परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षकों को नई अवधारणाओं को अपनाने और नेतृत्व करने के लिए सक्षम बनाना सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य है। सम्मेलन में शोध प्रस्तुतियां, इंटरैक्टिव कार्यशालाएं, संगोष्ठियां, पैनल चर्चाएं और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शोधकर्ताओं और शिक्षकों को स्कोपस-सूचीबद्ध पीटर लैंग प्रकाशनों के साथ-साथ जर्नल ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज टीचिंग (JELT) और जर्नल ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन इंग्लिश लिटरेचर (JTREL) जैसे जर्नल्स में शोध प्रकाशित करने के अवसर भी उपलब्ध होंगे, ऐसा ELTAI के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डाॅ.किशोर सेलवा बाबूने कहा।
पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘रीड फेस्ट’
सम्मेलन के साथ युवाओं में पढ़ने की आदत और पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘रीड फेस्ट’ का भी आयोजन किया गया है। इसका उद्घाटन सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री गिरीश प्रभुणे करेंगे। विद्यार्थियों में पढ़ने की रुचि विकसित करना, पुस्तकों के साथ उनका जुड़ाव मजबूत करना और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना इसका उद्देश्य है। रीड फेस्ट में विभिन्न समाचार पत्रों, पुस्तक प्रकाशकों और विद्यार्थियों के स्टॉल लगाए जाएंगे।
