बीएमसी एच-पश्चिम विभाग में तबादले के चार महीने बाद भी पुरानी कुर्सी पर जमे कॉलोनी ऑफिसर दिनेश मोरे!

दिनेश मोरे पर मेहरबान सहायक आयुक्त दिनेश पल्लेवाड, 27 अक्टूबर तक दस्तावेजों पर मोरे के हस्ताक्षर होने का दावा, बीएमसी प्रशासन की भूमिका पर सवाल

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के एच-पश्चिम विभाग में अधिकारियों के तबादले और कार्यभार हस्तांतरण को लेकर गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े हो गए हैं। कॉलोनी ऑफिसर दिनेश मोरे का तबादला 25 जून 2026 को एफ-दक्षिण विभाग में कर दिया गया था, लेकिन इसके चार महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनके एच-पश्चिम विभाग में सक्रिय रहने और नए अधिकारी को कार्यभार नहीं सौंपने का मामला सामने आया है। इससे बीएमसी के तबादला आदेशों और प्रशासनिक नियंत्रण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यालय के आदेश के अनुसार, दिनेश मोरे की जगह संदीप तुकाराम सावंत को एच-पश्चिम विभाग में नियुक्त किया गया था। बताया जाता है कि शुरुआत में लंबित कार्यों का हवाला देकर कार्यभार हस्तांतरण टाला जाता रहा। मामला सामने आने के बाद सहायक आयुक्त दिनेश पल्लेवाड ने 16 अक्टूबर 2026 को मोरे को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी किया। नए कॉलोनी ऑफिसर संदीप सावंत ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दिनेश मोरे को 16 अक्टूबर को कार्यमुक्त कर दिया गया है, लेकिन उन्होंने अब तक उन्हें कार्यभार नहीं सौंपा है। ऐसे में नए अधिकारी की नियुक्ति के बावजूद विभाग में कामकाज और अधिकारों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
27 अक्टूबर तक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर का दावा
इस मामले में सबसे गंभीर सवाल दिनेश मोरे की विभाग में सक्रियता को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 तक कुछ विभागीय कागजात पर उनके हस्ताक्षर होने का दावा किया जा रहा है। यदि यह सही है, तो सवाल उठता है कि कार्यमुक्त किए जाने के बाद भी वे किस आधिकारिक अधिकार के तहत दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहे थे? वहीं, सूत्रों के अनुसार नए अधिकारी संदीप सावंत के भी कुछ मामलों के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की बात सामने आई है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि और दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
वेतन एफ-दक्षिण से, कामकाज एच-पश्चिम में?
प्रशासनिक अधिकारी सुनील आहिरे का कहना है कि दिनेश मोरे का तबादला पहले ही हो चुका है और उनका वेतन भी एफ-दक्षिण विभाग से जारी हो रहा है। दूसरी ओर, सहायक आयुक्त दिनेश पल्लेवाड का कहना है कि मोरे को कार्यमुक्त किया जा चुका है। लेकिन दिनेश मोरे की एच-पश्चिम विभाग में उपस्थिति सहायक आयुक्त दिनेश पल्लेवाड की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अधिकारी का तबादला हो चुका है और वेतन नए विभाग से निकल रहा है, तो एच-पश्चिम विभाग में उनकी उपस्थिति और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर का आधार क्या है? यह भी जांच का विषय है कि तबादले के बाद उनकी उपस्थिति किस विभाग की बायोमीट्रिक प्रणाली में दर्ज हो रही थी और उनके कार्यमुक्त होने के बाद विभागीय फाइलों पर हस्ताक्षर करने की अनुमति किसने दी। यदि एक ही पद पर दो अधिकारियों ने अलग-अलग समय पर आधिकारिक कामकाज किया है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट होनी चाहिए। अब बीएमसी मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सतर्कता विभाग के सामने कई सवाल हैं। क्या दिनेश मोरे के तबादले के बाद उनकी एच-पश्चिम विभाग में उपस्थिति अधिकृत थी? 16 अक्टूबर को कार्यमुक्त किए जाने के बावजूद 27 अक्टूबर तक दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर कैसे हुए? नए अधिकारी को कार्यभार सौंपने में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है? और क्या इस पूरे मामले में किसी स्तर पर अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है?

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