थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए विवाह पूर्व जांच और काउंसलिंग पर जोर
स्वास्थ्य राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने ‘एक कदम थैलेसीमिया मुक्ति की ओर’ अभियान की समीक्षा की; स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता, गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग और HPLC जांच बढ़ाने के निर्देश

मुंबई। आनुवंशिक रक्त विकार थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए व्यापक जनजागरूकता, समय पर जांच और उचित काउंसलिंग पर अधिक जोर देने की जरूरत है। समाज के विभिन्न वर्गों तक थैलेसीमिया से जुड़ी आवश्यक जानकारी पहुंचाकर इसके रोकथाम संबंधी उपायों को गति दी जाए। यह निर्देश महाराष्ट्र की सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने दिए हैं। बुधवार को स्वास्थ्य भवन में राज्यमंत्री साकोरे-बोर्डीकर की अध्यक्षता में ‘एक कदम थैलेसीमिया मुक्ति की ओर’ अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की गई। बैठक में अभियान के तहत अब तक किए गए कार्यों और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। राज्यमंत्री ने कहा कि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है और इसकी रोकथाम के लिए जागरूकता, समय पर जांच तथा उचित चिकित्सा परामर्श महत्वपूर्ण हैं। नागरिकों, विद्यार्थियों, गर्भवती महिलाओं और स्वास्थ्य कर्मचारियों तक थैलेसीमिया के संबंध में सही जानकारी पहुंचाने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को लगातार प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया माइनर वाले व्यक्ति में जरूरी नहीं कि बीमारी के गंभीर लक्षण दिखाई दें। हालांकि, यदि दोनों संभावित माता-पिता थैलेसीमिया माइनर हों तो उनकी संतान में गंभीर थैलेसीमिया का जोखिम बढ़ सकता है। इसी कारण विवाह पूर्व जांच, काउंसलिंग और चिकित्सकीय मार्गदर्शन के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। राज्यमंत्री साकोरे-बोर्डीकर ने स्वास्थ्य विभाग को थैलेसीमिया स्क्रीनिंग के साथ HPLC/इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच, रक्तदान शिविर, गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग और स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने को कहा। स्कूल और कॉलेजों में भी थैलेसीमिया के बारे में जनजागरूकता कार्यक्रम बड़े स्तर पर आयोजित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि समय पर थैलेसीमिया की पहचान, उचित उपचार और रोकथाम के उपायों के माध्यम से बीमारी के प्रभाव को कम करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है। थैलेसीमिया से प्रभावित मरीजों के परिवार के सदस्यों की भी आवश्यक जांच और काउंसलिंग कर उन्हें उचित चिकित्सा मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
‘संकल्प सप्ताह’ के बाद अभियान को और गति देने के निर्देश
‘एक कदम थैलेसीमिया मुक्ति की ओर’ अभियान की वर्षगांठ के अवसर पर 1 से 8 मई 2026 तक ‘संकल्प सप्ताह’ आयोजित किया गया था। इसके माध्यम से थैलेसीमिया की रोकथाम को लेकर व्यापक जनभागीदारी और जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। राज्यमंत्री ने अभियान को आगे भी अधिक प्रभावी ढंग से जारी रखने और रोकथाम संबंधी गतिविधियों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में आयुक्त संजय काटकर, आयुक्त (शहरी) डॉ. सुनील भोकरे, निदेशक डॉ. विजय कंदेवाड, उपसचिव राजश्री सारंग, राज्य समन्वयक लक्ष्मीकांत पिंपलगांवकर और मुख्यमंत्री कार्यालय के समन्वयक चेतन भोजकर उपस्थित रहे। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के सभी मंडलों के उपनिदेशक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
