महाराष्ट्र में सूखे का संकट गहराया: सूखे से निपटने के लिए अगले आठ महीने विशेष राहत की तैयारी, किसानों और मजदूरों को मिलेगा सहारा: मुख्यमंत्री फडणवीस

केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल के साथ मुख्यमंत्री की बैठक, रोजगार, खाद्यान्न, पेयजल और पशुओं के चारे की व्यवस्था पर जोर, अगस्त 2027 तक पीने के पानी को पहली प्राथमिकता


मुंबई। महाराष्ट्र में गंभीर सूखे की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को अगले छह से आठ महीनों तक अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए रोजगार सृजन, जरूरतमंदों तक खाद्यान्न पहुंचाने, पेयजल की व्यवस्था करने तथा पशुधन के लिए चारा और पानी उपलब्ध कराने की विस्तृत योजना बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल के साथ आयोजित बैठक में यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर आयोजित बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव पाटील, केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल के प्रमुख एवं केंद्रीय संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि केंद्रीय निरीक्षण दल ने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का व्यापक दौरा कर जमीनी परिस्थितियों का प्रत्यक्ष आकलन किया है। दल के सदस्यों ने गांवों में जाकर किसानों से बातचीत की और खेती, पेयजल तथा अन्य समस्याओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय दल अपनी निरीक्षण रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा, जिससे राज्य में सूखे की गंभीरता को समझने और राहत प्रक्रिया आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
दो महीने बारिश नहीं होने से सोयाबीन को सबसे ज्यादा नुकसान
मुख्यमंत्री ने बताया कि मानसून के शुरुआती दो महीनों में अच्छी बारिश होने के कारण राज्य में रिकॉर्ड कृषि उत्पादन की उम्मीद थी। लेकिन जब फसलें फूल आने की अवस्था में थीं, उसी दौरान लगभग दो महीने तक बारिश नहीं हुई। इसका सबसे अधिक असर सोयाबीन की फसल पर पड़ा। उन्होंने कहा कि सोयाबीन के अलावा कपास, अरहर और गन्ने की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। पानी की कमी के कारण रबी की बुवाई की संभावनाएं काफी कम हो गई हैं, जबकि गर्मी की फसलों के लिए भी पर्याप्त अवसर नहीं बचा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में किसान खरीफ की फसल में हुए नुकसान की भरपाई रबी या गर्मी की फसलों से करने का प्रयास करते हैं, लेकिन इस वर्ष सूखे के कारण ऐसी संभावना भी सीमित हो गई है। इससे विशेष रूप से उन छोटे किसानों के सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है, जो खेती के साथ खेतिहर मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे परिवारों को रोजगार और खाद्य सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है।
अगस्त 2027 तक पेयजल के लिए पानी का पहला आरक्षण
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों को हाल के दिनों में हुई बारिश से कुछ लाभ मिला है, लेकिन महाराष्ट्र के अनेक ग्रामीण इलाकों, विशेषकर छोटे गांवों में जलस्रोत सूख गए हैं। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की आवश्यकता होगी। राज्य सरकार इसके लिए तकनीक आधारित व्यवस्था तैयार कर रही है, ताकि प्रत्येक जरूरतमंद गांव तक पारदर्शी और योजनाबद्ध तरीके से पेयजल पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि अगस्त 2027 तक उपलब्ध पानी का पहला आरक्षण पेयजल के लिए किया गया है। इसमें नागरिकों और पशुधन के लिए आवश्यक पानी की अलग-अलग व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इन जरूरतों को पूरा करने के बाद ही अन्य उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था का कड़ाई से पालन किया जाएगा, ताकि आने वाले महीनों में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को कम किया जा सके।
जलाशयों से गाद निकालने और जल संरक्षण कार्यों से मिलेगा रोजगार
सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार केंद्र और राज्य की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जलाशयों से गाद निकालने, पुराने जल संरक्षण ढांचों की मरम्मत तथा जलस्रोतों के पुनर्जीवन के कार्य बड़े पैमाने पर शुरू करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे पहले राज्य के लगभग 25 हजार गांवों में किए गए जल संरक्षण कार्यों से सकारात्मक परिणाम मिले थे। इन कार्यों के कारण पानी की 15 से 17 प्रतिशत कमी होने के बावजूद संबंधित क्षेत्रों को राहत मिली थी। उन्होंने कहा कि अब इसी प्रकार के कार्यों को अधिक व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। इनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा।
ग्रामीण नागरिकों को जल संरक्षण कार्यों में सहभागी बनाया जाएगा। ‘माथे से पायथे तक’ अर्थात पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से निचले हिस्से तक जल संरक्षण की अवधारणा के आधार पर पुराने ढांचों की मरम्मत और नई संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इससे गांवों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहायता मिलने के साथ भविष्य के लिए जल उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
पशुधन के लिए 90 से 120 दिनों का चारा उपलब्ध, जरूरत पड़ी तो दूसरे राज्यों से मंगाएंगे
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में वर्तमान समय में लगभग 90 से 120 दिनों तक का चारा उपलब्ध है। हालांकि, सूखे की स्थिति लंबी खिंचने की आशंका को देखते हुए सरकार ने अतिरिक्त चारा उपलब्ध कराने की योजना तैयार की है।
जिन जलग्रहण क्षेत्रों की मिट्टी में अभी नमी बनी हुई है, वहां चारा उत्पादन बढ़ाया जाएगा। उपलब्ध चारे को सरकार द्वारा घोषित दरों पर खरीदकर उसके भंडारण की व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर उन राज्यों से भी चारा मंगाने पर विचार किया जाएगा, जहां इस वर्ष अच्छी बारिश हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुधन को बचाने के लिए जरूरत के अनुसार चारा छावनियां और पशु शिविर शुरू करने का विकल्प भी अपनाया जाएगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए पशुओं के लिए चारा और पानी उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
केंद्र को भेजा जाएगा विस्तृत प्रस्ताव, राहत प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के निर्धारित मानदंडों के अनुसार आंकड़ों पर आधारित विस्तृत और सटीक प्रस्ताव प्रस्तुत करेगी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने पहले ही राज्य सरकार से अग्रिम प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए संपर्क किया था, जिसके बाद राज्य ने आवश्यक प्रस्ताव भेज दिया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री ने भी अंतरमंत्रालयीन समूह की बैठक शीघ्र आयोजित कर राहत सहायता की प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में फसल बीमा का दायरा तुलनात्मक रूप से सीमित है, लेकिन जिन किसानों ने बीमा कराया है, उन्हें जल्द से जल्द बीमा राशि का लाभ दिलाने के लिए राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से प्रयास करेगी।
सात जिलों के सूखाग्रस्त गांवों का केंद्रीय टीमों ने किया निरीक्षण
केंद्रीय अधिकारियों की तीन टीमों ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर, सोलापुर, जालना, बीड, धाराशिव, वाशिम और यवतमाल सहित विभिन्न जिलों के सूखाग्रस्त गांवों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान टीमों ने प्रभावित खेतों, फसलों और जलस्रोतों की स्थिति देखी। साथ ही किसानों से बातचीत कर फसल नुकसान, पानी की उपलब्धता और आजीविका से जुड़ी समस्याओं की जानकारी प्राप्त की।
बैठक में केंद्रीय दल के प्रमुख मुक्तानंद अग्रवाल और अन्य सदस्यों ने निरीक्षण के दौरान सामने आई परिस्थितियों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। राज्य सरकार की ओर से राहत एवं पुनर्वास विभाग की अपर मुख्य सचिव विनिता वेद सिंघल, राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव पराग जैन नैनुटिया, सहकारिता एवं विपणन विभाग के प्रधान सचिव प्रवीण दराडे, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एकनाथ डवले, कृषि विभाग के सचिव परिमल सिंह, रोजगार गारंटी योजना विभाग के सचिव अप्पासो धुळाज, जल संरक्षण विभाग के सचिव जितेंद्र पापळकर, पशुसंवर्धन आयुक्त डॉ. किरण पाटील और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एम. श्रीनिवास राव ने अपने-अपने विभागों की तैयारियों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सूखे से प्रभावित किसानों, मजदूरों और ग्रामीण नागरिकों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार रोजगार, खाद्य सुरक्षा, पेयजल, पशुधन संरक्षण और जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं पर समन्वित रूप से काम करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्रीय निरीक्षण दल की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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