चुनाव आयोग पर कांग्रेस का देशव्यापी हल्लाबोल, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग
कोलकाता से चंडीगढ़, दिल्ली, पटना और गुवाहाटी तक सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता, दो चुनाव आयुक्तों की कथित 14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद तेज हुआ विवाद

नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार को देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की। पार्टी ने उनके कार्यकाल में लिए गए संबंधित फैसलों और मतदाता सूचियों में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की भी मांग की है। कांग्रेस ने प्रदेश इकाइयों से 25 सितंबर को प्रदर्शन करने को कहा था और जिला कांग्रेस समितियों को 28 सितंबर को जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च आयोजित करने का निर्देश दिया है।
यह आंदोलन द इंडियन एक्सप्रेस की उस जांच रिपोर्ट के बाद तेज हुआ है, जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल हैं। अखबार ने यह भी लिखा कि उसने चुनाव आयोग और दोनों चुनाव आयुक्तों से प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन प्रकाशन तक जवाब नहीं मिला था।
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने और गिरफ्तार करने की मांग की। ये कांग्रेस के आरोप हैं; उपलब्ध रिपोर्टिंग अपने आप में किसी आपराधिक दोषसिद्धि या न्यायिक निष्कर्ष को स्थापित नहीं करती। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को कानूनसम्मत बताया है और कहा है कि आयोग के निर्णय बहुमत की व्यवस्था के तहत लिए जाते हैं। कोलकाता में पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर मार्च किया। पुलिस ने बी.बी. गांगुली स्ट्रीट के पास प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तथा गिरफ्तारी की मांग दोहराई। दिल्ली में भी युवा कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। वहीं चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। देश के कई अन्य शहरों में भी कांग्रेस के प्रदर्शन हुए। SIR को लेकर विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बड़ी संख्या में मतदाता नामों का ड्राफ्ट सूचियों से हटना है। इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटे। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम हटना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सभी संबंधित व्यक्ति पात्र मतदाता थे या उन्हें अंतिम रूप से मताधिकार से वंचित किया गया; विभिन्न राज्यों में दावे, आपत्तियां और अपील की प्रक्रियाएं भी चली हैं। कांग्रेस का कहना है कि आयोग के भीतर सामने आई कथित आपत्तियों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और SIR से जुड़े विवादित फैसलों की समीक्षा की जानी चाहिए। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का विरोध किया है। इस तरह मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।
