झाबुआ में कुएं से मिले तीन मासूमों के शव, मौत के कारणों पर गहराया रहस्य
शवों की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में बलि की आशंका की चर्चा, पुलिस ने कहा— अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं, पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट का इंतजार

झाबुआ, मध्य प्रदेश। जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर राणापुर विकासखंड के ग्राम चुई के पटेल फलिया में कुएं से तीन मासूम बच्चों के शव मिलने की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक साथ तीन बच्चों की मौत से गांव में मातम पसरा है। वहीं बच्चों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और वे कुएं तक कैसे पहुंचे, इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। मृत बच्चों की पहचान विवेक (9) पुत्र महेश राठौड़, मयंक (8) पुत्र शैलेष चौहान और विजय (9) पुत्र बाबू चंगोड़ के रूप में हुई है। तीनों बच्चों के शव कुएं से मिलने के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर एकत्र हो गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
शवों की हालत देखकर ग्रामीणों में बढ़ा संदेह
कुएं से शव बाहर निकाले जाने के दौरान उनकी स्थिति देखकर ग्रामीणों में चिंता और संदेह बढ़ गया। शवों की हालत को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ ग्रामीणों ने बलि जैसी आशंका भी जताई है। हालांकि पुलिस और प्रशासन की ओर से अभी तक ऐसी किसी आशंका की पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की मौत दुर्घटनावश डूबने से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण है, यह पोस्टमार्टम, विसरा और अन्य जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस घटनास्थल, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
चार घंटे की मशक्कत के बाद निकाले गए शव
तीनों बच्चों के शव कुएं से बाहर निकालने के लिए करीब चार घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान ग्रामीणों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी बचाव और अन्य आवश्यक कार्यों में सहयोग किया। बच्चों के शव बाहर आते ही पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार राजेंद्र चौहान और थाना प्रभारी श्रीराम मंडलोई पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक कार्रवाई करवाई। शवों को बाहर निकालने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
पोस्टमार्टम के बाद विसरा सुरक्षित
थाना प्रभारी श्रीराम मंडलोई के अनुसार, तीनों बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। विसरा सुरक्षित कर उसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा जांच से प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि तीनों बच्चे कुएं तक कैसे पहुंचे और क्या तीनों के साथ एक ही समय पर कोई घटना हुई। जांच में बच्चों की गतिविधियों, घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों पर ध्यान दिया जा रहा है।
एसपी ने किया घटनास्थल का निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मामले की गहराई से जांच करने और सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल के निर्देश दिए। पुलिस का कहना है कि ग्रामीणों की ओर से जताई जा रही आशंकाओं को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा, लेकिन बिना वैज्ञानिक और चिकित्सकीय रिपोर्ट के किसी नतीजे पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया पहुंचे अस्पताल
घटना की जानकारी मिलने पर बुधवार को झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया अस्पताल पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और दिवंगत बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित की। चिकित्सक होने के नाते उन्होंने पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान भी स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने थाना प्रभारी और तहसीलदार से चर्चा कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने पर जोर दिया।
कांग्रेस नेता ने भी उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश डामोर ने कहा कि तीन बच्चों की एक साथ मौत की घटना बेहद गंभीर है। उन्होंने शवों की स्थिति को लेकर ग्रामीणों के बीच उठ रहे सवालों का उल्लेख करते हुए प्रशासन से मांग की कि मामले के प्रत्येक पहलू की बारीकी से जांच की जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। उनका कहना था कि घटना को लेकर गांव में कई तरह की चर्चाएं हैं, इसलिए जांच पूरी तरह निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार पर होनी चाहिए।
परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता
घटना के बाद प्रशासन ने मृतक बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई है। झाबुआ एसडीएम महेश मंडलोई की ओर से प्रत्येक मृतक बच्चे के परिजन को चार-चार लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। तीन मासूमों की एक साथ मौत से चुई गांव ही नहीं, आसपास का पूरा क्षेत्र गहरे सदमे में है। परिजनों के सामने अपने बच्चों को खोने का असहनीय दुख है, वहीं ग्रामीणों के मन में घटना को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। फिलहाल सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा जांच और पुलिस की आगे की जांच पर टिकी हैं। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि तीनों बच्चों की मौत महज हादसा थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
