मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्यमिता योजना’ के नाम पर फर्जी विज्ञापनों से रहें सावधान, सरकार ने किया अलर्ट
जल्द ऑनलाइन शुरू होंगे आवेदन; किसी निजी व्यक्ति या संस्था को अधिकृत नहीं किया गया, सहायता के लिए 1962 टोल-फ्री नंबर जारी

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार के पशुसंवर्धन विभाग ने ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्यमिता योजना’ के नाम पर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे भ्रामक विज्ञापनों से नागरिकों को सावधान रहने की अपील की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के लिए आवेदन जल्द ही ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से शुरू किए जाएंगे और इसके लिए सरकार ने किसी भी गैर-सरकारी व्यक्ति, कंपनी अथवा संस्था को अधिकृत नहीं किया है। पशुसंवर्धन विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ कंपनियां मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्यमिता योजना के नाम पर लोगों से दस्तावेज जमा कर रही हैं। इसे देखते हुए विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नागरिकों को ऐसे विज्ञापनों और दावों के झांसे में नहीं आने की चेतावनी दी है। राज्य मंत्रिमंडल ने 9 मार्च 2026 के शासन निर्णय के तहत इस योजना को मंजूरी दी है। योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन के माध्यम से उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इसके तहत लाभार्थियों को दुधारू गाय, भैंस, बकरी, भेड़, कुक्कुट पक्षी और सूअर अनुदान के आधार पर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन प्रणाली विकसित करने का काम अंतिम चरण में है और जल्द ही आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। आवेदकों की सुविधा के लिए 7/12 उतारा, राशन कार्ड, दिव्यांग प्रमाणपत्र और जाति प्रमाणपत्र जैसे कई आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन माध्यम से स्वतः उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। योजना के लिए सरकार के महा-DBT पोर्टल के माध्यम से केवल आधार कार्ड नंबर अथवा महा-आईडी नंबर दर्ज कर आवेदन किया जा सकेगा। इसलिए नागरिकों को किसी एजेंट, निजी कंपनी या अन्य संस्था के जरिए दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है। पशुसंवर्धन विभाग ने कहा है कि आवेदन भरते समय किसी तरह की समस्या या शंका होने पर आवेदक अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय अथवा पशुसंवर्धन कार्यालय से संपर्क करें। इसके अलावा सहायता के लिए 1962 टोल-फ्री नंबर पर भी संपर्क किया जा सकता है। विभाग ने एक बार फिर नागरिकों से अपील की है कि योजना के नाम पर सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले भ्रामक विज्ञापनों पर भरोसा न करें और आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अधिकृत ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से ही आवेदन करें।
