गोकुळ में कांग्रेस बनाम भाजपा की जंग तेज, सतेज पाटील बोले- बहुमत का अपमान बर्दाश्त नहीं

कोल्हापुर। कोल्हापुर सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुळ) के चुनाव के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा पांच संचालकों को नामित करने के फैसले के बाद गोकुळ दूध संघ की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच संघर्ष खुलकर सामने आ गया है। इस विवाद के राजनीतिक परिणाम गल्ली से लेकर दिल्ली तक दिखाई देने लगे हैं। गोकुळ में महायुति की सत्ता स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा कथित तौर पर नई रणनीति अपनाए जाने के आरोपों के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। वहीं, कांग्रेस विधायक सतेज पाटील ने भी भाजपा और महायुति के नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए सरकार के फैसले को लोकतंत्र और किसानों के जनादेश के खिलाफ बताया। सतेज पाटील ने सवाल उठाया कि चुनाव के बाद संचालकों को नामित करने का प्रावधान किसके कहने पर कानून में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा नेता एवं मंत्री चंद्रकांत पाटील और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता एवं मंत्री हसन मुश्रीफ पर भी निशाना साधा। पाटील ने आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल का फैसला लोकतंत्र और जनता के मताधिकार को कमजोर करने वाला है। गोकुळ को केंद्र में रखकर निर्वाचित संचालक मंडल में नामित सदस्यों को शामिल करने के लिए कानून बनाया जा रहा है और भविष्य में इस संबंध में अध्यादेश भी जारी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं से संबंधित इस प्रस्तावित कानून का दायरा सीमित रखा गया है। इसमें गोकुळ सहित दो संस्थाओं को शामिल किया गया है, जबकि चीनी मिलों और जिला बैंकों को इससे बाहर रखा गया है। सतेज पाटील ने आरोप लगाया कि कोल्हापुर की जनता ने चुनाव में जो जनादेश दिया है, सरकार उसे नकारने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि उनके पैनल को 13 सीटों का बहुमत मिला है, लेकिन सरकार तकनीकी प्रावधानों के जरिए इस बहुमत को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने मंत्रिमंडल के फैसले को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताते हुए इसका विरोध किया। पत्रकार परिषद में सतेज पाटील ने कहा कि गोकुळ दूध संघ से लगभग साढ़े पांच लाख किसानों के परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। किसानों को हर दस दिन में उनके दूध के भुगतान के रूप में लगभग 100 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। संघ प्रतिदिन करीब 20 लाख लीटर दूध संकलित करता है और अमूल के बाद इसे देश के सबसे बड़े दूध उत्पादक सहकारी संघों में से एक माना जाता है। उन्होंने कहा कि गोकुळ दूध संघ किसानों की संस्था है और इसे किसानों के नियंत्रण में बनाए रखने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। राहुल गांधी ने भी उनके पैनल को समर्थन दिया है। सतेज पाटील ने आरोप लगाया कि किसानों की आर्थिक स्थिति पहले से ही कठिन है, ऐसे में सरकार का यह कदम किसानों के हितों के खिलाफ है।
