अंबरनाथ हत्याकांड का 12 घंटे में खुलासा, ट्रेन से आंध्र प्रदेश भाग रहा मुख्य आरोपी गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच यूनिट-4 उल्हासनगर की कार्रवाई: कल्याण रेलवे स्टेशन पर जनरल कोच से मुख्य आरोपी दबोचा, दूसरा आरोपी अंबरनाथ पश्चिम से गिरफ्तार

इंद्र यादव/ठाणे। कहते हैं कि अपराध करने के बाद भाग निकलना आसान है, लेकिन तकनीक और पुलिस का मुखबिर तंत्र कई बार अपराधी की पूरी योजना पर पानी फेर देता है। ठाणे जिले के अंबरनाथ में सामने आए हत्या के एक सनसनीखेज मामले को ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-4, उल्हासनगर ने महज 12 घंटे के भीतर सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपी को आंध्र प्रदेश भागने से पहले कल्याण रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के जनरल डिब्बे से गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसके दूसरे साथी को अंबरनाथ पश्चिम से दबोचा गया। मामला 28 सितंबर 2026 का है। अंबरनाथ पुलिस थाने में हत्या को लेकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया गया था। वारदात के बाद मुख्य आरोपी फरार हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने समानांतर जांच शुरू की। पुलिस ने तकनीकी जांच और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर आरोपी की तलाश तेज की। जांच के दौरान सूचना मिली कि मुख्य आरोपी अपना ठिकाना छोड़कर अपने पैतृक गांव चित्तागुड़ा, आंध्र प्रदेश भागने की तैयारी में है और ट्रेन के रास्ते महाराष्ट्र से निकल सकता है। सूचना मिलते ही पुलिस ने तीन विशेष टीमें गठित कीं। टीमों को कल्याण रेलवे स्टेशन और वहां से गुजरने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों की जांच में लगाया गया। रेलवे स्टेशन और ट्रेनों के डिब्बों में तलाशी के दौरान पुलिस को आखिरकार सफलता मिली।
पुलिस ने ट्रेन के जनरल डिब्बे से मुख्य आरोपी गोविंद रामलू कोली उर्फ चिन्ना (30) को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद मामले में उसके कथित साथी संदीप दिलीप म्हेत्रे (29) का नाम सामने आया, जिसके बाद पुलिस टीम ने उसे भी अंबरनाथ पश्चिम से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ हत्या के मामले का महज 12 घंटे में पर्दाफाश कर दिया गया। आरोपियों से पूछताछ कर हत्या के पीछे की वजह और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। इस पूरी कार्रवाई को सह पुलिस आयुक्त (अपराध) डॉ. पंजाबराव उगले, पुलिस उपायुक्त अमरसिंह जाधव, सहायक पुलिस आयुक्त शेखर बागडे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजेश गजल के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। हत्या जैसे गंभीर अपराध के बाद आरोपी का इतनी तेजी से पता लगाकर उसे राज्य से बाहर निकलने से पहले पकड़ लेना पुलिस की त्वरित कार्रवाई को दर्शाता है। वहीं यह वारदात एक गंभीर सामाजिक सवाल भी छोड़ती है—आखिर मामूली विवाद, गुस्से या आपसी रंजिश में इंसानी जान लेने की प्रवृत्ति कब थमेगी? सिर्फ कानून को कठोर बनाना पर्याप्त नहीं है। अपराध रोकने के लिए पुलिस की मौजूदगी और त्वरित कार्रवाई के साथ समाज में संयम, विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, युवाओं में कानूनी जागरूकता और हिंसा को सामान्य मानने वाली मानसिकता में बदलाव भी जरूरी है। कानून का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उसका डर अपराध होने के बाद गिरफ्तारी के समय नहीं, बल्कि अपराध करने का विचार आने से पहले काम करे।
