महाराष्ट्र को सूखामुक्त बनाने के लिए हर बूंद पानी बचाने पर जोर, मुख्यमंत्री फडणवीस ने सभी विभाग को समन्वय से कार्य करने के दिए निर्देश
‘पानी रोको, पानी जमीन में उतारो’ अभियान को मिलेगी गति, जल संरक्षण के लिए सभी विभागों को संयुक्त कार्ययोजना बनाने का आदेश

मुंबई। महाराष्ट्र में सूखे की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी सरकारी विभागों को आपसी समन्वय के साथ योजनाबद्ध और तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में बारिश के पानी की हर बूंद को संरक्षित करने के लिए ‘पानी रोको, पानी जमीन में उतारो’ की अवधारणा को प्राथमिकता दी जाए। जल संरक्षण के कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक लाभ गांवों और किसानों तक पहुंचना चाहिए। मुख्यमंत्री फडणवीस शनिवार, 10 अक्टूबर को मुंबई स्थित अपने सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर आयोजित जल संरक्षण संबंधी बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस वर्ष राज्य में वॉटर कप अभियान पहले शुरू किया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सूखे की चुनौती से निपटने के लिए सभी विभागों को एकजुट होकर काम करना होगा। पानी फाउंडेशन सहित जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं को प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय सहयोग दिया जाए। जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और क्षेत्रीय अधिकारी आपसी समन्वय से इस अभियान को गति दें।
जल संरक्षण के लिए बनेगी एकीकृत कार्ययोजना
मुख्यमंत्री फडणवीस ने निर्देश दिए कि बैठक में निर्धारित अवधारणाओं के आधार पर पूरे राज्य के लिए एकीकृत जल संरक्षण कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की जाए और कार्यों की प्रगति पर नजर रखने के लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि कृषि, जल संरक्षण और अन्य संबंधित विभागों की योजनाओं को एक-दूसरे से जोड़कर काम करने की आवश्यकता है। सभी विभागों के बीच समन्वय होने से संसाधनों का प्रभावी उपयोग होगा और कार्यों में अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले भी राज्य के जिलाधिकारियों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, कृषि विभाग और क्षेत्रीय प्रशासन ने विभिन्न अभियानों में उल्लेखनीय कार्यक्षमता दिखाई है। कठिन परिस्थितियों में प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ काम करते हैं तो परिणाम तेजी से सामने आते हैं।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में पहले भी ऐसे अभियान चलाए गए हैं, जिनमें अधिकारी और नागरिक सुबह से ही श्रमदान एवं अन्य कार्यों में जुट जाते थे। अब उसी उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ जल संरक्षण के लिए आगे आने की आवश्यकता है।
पहली बारिश से पहले तैयार हों जल संरक्षण के सभी कार्य
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि जल संरक्षण की योजनाओं का क्रियान्वयन इस प्रकार किया जाए कि पहली बारिश होते ही पानी रोकने और जमीन में उतारने की संरचनाएं तैयार रहें। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के कार्यों का उद्देश्य केवल निर्माण पूरा करना नहीं, बल्कि वर्षा जल का अधिकतम संचयन करना और भूजल स्तर बढ़ाना होना चाहिए। फडणवीस ने कहा कि यदि बारिश के पानी को प्रभावी तरीके से रोका और जमीन में उतारा जाए तो भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे गांवों को सूखे की समस्या से स्थायी राहत दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल संरक्षण के कार्य केवल प्रशासनिक बैठकों और दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। प्रत्येक योजना का वास्तविक और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
पानी फाउंडेशन और स्वयंसेवी संस्थाओं को मिलेगा प्रशासनिक सहयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को सूखामुक्त बनाने की दिशा में सरकारी विभागों के साथ सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। पानी फाउंडेशन और अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों को प्रशासन सक्रिय सहयोग प्रदान करे। जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और क्षेत्रीय अधिकारियों को इन संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान की गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली भी विकसित की जाए, ताकि कार्यों की प्रगति का नियमित आकलन हो सके और निर्धारित समय में योजनाएं पूरी की जा सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों और प्रभावी जल प्रबंधन से महाराष्ट्र के गांवों को सूखामुक्त बनाने की दिशा में ठोस प्रगति संभव होगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने सभी अधिकारियों और संबंधित विभागों से इस अभियान को एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करने का आह्वान करते हुए कहा कि सूखे के खिलाफ इस लड़ाई में सभी को एकजुट होकर काम करना होगा।
