
मुंबई। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र विधानसभा सदस्य अबू आजमी ने देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और विपक्षी नेताओं पर हो रही केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को कमजोर करने और विपक्ष को पूरी तरह समाप्त करने की सुनियोजित साजिश चल रही है। पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए आजमी ने कहा कि यह केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि विपक्ष को डराने और दबाने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में ‘विपक्ष मुक्त भारत’ की मुहिम चलाई जा रही है, जिसमें सत्ता पक्ष को इस बात की परवाह नहीं है कि देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाए या आने वाली पीढ़ियां कर्ज के बोझ तले दब जाएं। आजमी ने कहा- सत्ता में बैठे लोगों को बस एक पार्टी का शासन चाहिए, चाहे इसके लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को ही क्यों न कुचलना पड़े। उन्होंने देश में गिरती कानून-व्यवस्था और सरकार की कथित मनमानी पर चिंता जताते हुए जनता से अपील की कि वे महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और मूल्यों के रास्ते पर चलकर ऐसी राजनीति को लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दें। जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा राहुल गांधी और उमर खालिद को लेकर दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अबू आजमी ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वालों की मानसिकता समाज में जहर घोलने वाली है और उनका उद्देश्य केवल एक दल विशेष को बचाए रखना प्रतीत होता है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे पर निशाना साधते हुए आजमी ने उन्हें ‘नफरत का पुजारी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में निष्पक्ष और संवैधानिक मूल्यों के प्रति ईमानदार होती, तो नफरत फैलाने वाले बयानों के लिए ऐसे नेताओं को अब तक मंत्रिमंडल से हटाया जा चुका होता। आजमी के अनुसार, राणे जैसे नेताओं की राजनीति का एकमात्र उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण कर चुनावी लाभ हासिल करना है। सपा विधायक रईस शेख की कथित बगावत के सवाल पर अबू आजमी ने इसे सत्ता और पद के लालच से जोड़ते हुए कहा, “छोटी हांडी में जल्दी उबाल आता है।” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति में कई लोग शोहरत और ताकत की चाह में अपने ही साथियों और सिद्धांतों से समझौता कर लेते हैं। बीएमसी चुनाव नजदीक आने के बीच उर्दू भाषा को लेकर छिड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए आजमी ने राज ठाकरे के सहयोगियों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो लोग सार्वजनिक रूप से उर्दू का विरोध कर रहे हैं, वही खुद उर्दू में हैंडबिल छापकर प्रचार कर रहे हैं। इसे उन्होंने ‘मुँह में राम, बगल में छुरी’ की नीति बताया। आजमी ने स्पष्ट किया कि चुनाव धर्म या भाषा के नाम पर नहीं, बल्कि विकास, स्वच्छ पानी, मुफ्त बिजली, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और गरीबों को आवास जैसे बुनियादी मुद्दों पर होने चाहिए। उमर खालिद और शरजील इमाम का जिक्र करते हुए अबू आजमी ने न्यायपालिका और सरकार दोनों से सवाल किया कि जमानत, जो कि एक मौलिक अधिकार है, उससे इन लोगों को लंबे समय से वंचित क्यों रखा गया है। उन्होंने कहा कि कानून का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। आजमी ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की मजबूती निष्पक्ष न्याय व्यवस्था और स्वतंत्र विपक्ष से ही संभव है, न कि डर और दमन की राजनीति से।




