महाराष्ट्र में सूखे का जायजा लेने पहुंची केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम, 11 अक्टूबर तक करेगी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा
फसल नुकसान, पेयजल संकट और पशु चारे की स्थिति का होगा प्रत्यक्ष आकलन, मुंबई में मुख्य सचिव की मौजूदगी में हुई प्रारंभिक बैठक

मुंबई। खरीफ सीजन 2026 के दौरान महाराष्ट्र में पैदा हुई सूखे की स्थिति और फसलों को हुए नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम महाराष्ट्र के दौरे पर पहुंची है। टीम 11 अक्टूबर तक राज्य के विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर वर्षा की स्थिति, फसल नुकसान, पेयजल उपलब्धता और पशुओं के चारे की स्थिति का जायजा लेगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल इस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। दल में कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, पेयजल, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, पशुपालन, वित्त, नीति आयोग सहित केंद्र सरकार के विभिन्न संबंधित विभागों के प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी शामिल हैं। मुंबई पहुंचने के बाद केंद्रीय टीम की बैठक सह्याद्री अतिथि गृह में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल की प्रमुख उपस्थिति में हुई। बैठक में राज्य सरकार ने महाराष्ट्र की सूखा स्थिति और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। मुख्य सचिव ने केंद्रीय दल का ध्यान कम वर्षा के कारण कुछ हिस्सों में उत्पन्न जल संकट, आने वाले समय में टैंकरों की संभावित आवश्यकता, खेती पर निर्भर मजदूरों और भूमिधारकों की समस्याओं, संभावित पलायन तथा किसान आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों की ओर आकर्षित किया। राज्य के राहत एवं पुनर्वास विभाग की अपर मुख्य सचिव विनिता वेद-सिंगल ने वर्षा की स्थिति, अल नीनो के कारण मौसम और बारिश पर पड़े प्रभाव तथा कृषि फसलों के नुकसान की तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। इसके साथ ही पेयजल उपलब्धता की मौजूदा स्थिति भी केंद्रीय टीम के सामने रखी गई। कृषि विभाग के सचिव परिमल सिंह और आयुक्त सूरज मांढरे ने जिलेवार फसल नुकसान और कृषि की स्थिति का विवरण दिया। पशुसंवर्धन आयुक्त डॉ. किरण पाटील ने पशु चारे की वर्तमान उपलब्धता और आगामी सात महीनों में संभावित स्थिति की जानकारी दी।
पेयजल संकट और टैंकर व्यवस्था की समीक्षा
कम बारिश के कारण राज्य के कई क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता प्रभावित हुई है। जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव पराग जैन और भूजल सर्वेक्षण एवं विकास आयुक्त रवींद्र खेबुडकर ने वर्तमान में टैंकरों से हो रही जलापूर्ति, पिछले तीन वर्षों की तुलना में जल उपलब्धता तथा उन गांवों की जानकारी दी, जहां आने वाले समय में टैंकर से पानी पहुंचाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एकनाथ डवले, जलसंरक्षण विभाग के सचिव जितेंद्र पापळकर, रोजगार गारंटी योजना के सचिव अप्पासाहेब धुळाज तथा ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने भी मौजूदा और अगले सात महीनों की संभावित स्थिति का विवरण प्रस्तुत किया। लघु सिंचाई तालाबों, गांवों के जलस्रोतों और उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में भी केंद्रीय टीम को जानकारी दी गई।
अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर करेगी प्रत्यक्ष निरीक्षण
राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों, दस्तावेजों और विभिन्न विभागों से मिली जानकारी के आधार पर केंद्रीय टीम ने प्रत्यक्ष निरीक्षण के लिए जिलों और स्थानों का चयन किया है। अधिक से अधिक प्रभावित क्षेत्र का आकलन करने के लिए टीम को अलग-अलग समूहों में बांटकर विभिन्न जिलों में भेजने की योजना बनाई गई है। निरीक्षण के दौरान केंद्रीय अधिकारी स्थानीय प्रशासन, विशेषज्ञों और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर सूखे की वास्तविक स्थिति, फसल नुकसान, जल संकट और पशु चारे की उपलब्धता का आकलन करेंगे। मैदानी दौरा पूरा होने के बाद टीम मुंबई लौटेगी और 11 अक्टूबर को राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ सूखे की स्थिति पर विस्तृत चर्चा करेगी। इसके बाद महाराष्ट्र की वास्तविक स्थिति, कृषि नुकसान, जल संकट और आवश्यक राहत उपायों से संबंधित आकलन केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा। बैठक में राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, ग्राम विकास विभाग के सचिव डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार, पर्यावरण विभाग की सचिव जयश्री भोज सहित केंद्रीय दल के सदस्य और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
