12 फरवरी को होने वाला था दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस का विलय! अजितदादा होते तो राजनीतिक तस्वीर अलग होती: शशिकांत शिंदे का बड़ा खुलासा

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों के विलय की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। सांसद शरद पवार की तबीयत खराब होने के कारण अस्पताल में उनका उपचार जारी है। उनकी कुशलक्षेम जानने के लिए विभिन्न राजनीतिक नेता उनसे मुलाकात कर रहे हैं। 5 नवंबर को अजित पवार गुट के नेता प्रफुल्ल पटेल ने शरद पवार से मुलाकात की, जिसके बाद दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय को लेकर चर्चाओं ने नया जोर पकड़ लिया। इसी बीच सांसद सुनील तटकरे के बयान के बाद शरद पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण खुलासा किया है। शशिकांत शिंदे ने कहा कि अजितदादा की बारामती में बैठक होने से पहले जयंत पाटील के निवास पर भी एक बैठक हुई थी। इसी बैठक में विलय का निर्णय लिया गया था। अजितदादा दूरदर्शी नेता थे। हम कई वर्षों से पवार साहब के साथ काम कर रहे हैं। शरद पवार की पार्टी और अजितदादा की पार्टी में भी कई नेता हैं। भविष्य में यदि दोनों दल एक साथ आते हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है। वर्तमान राजनीति में राजनीतिक ताकत होना बेहद जरूरी है। राजनीतिक ताकत के बिना किसी को भी राजनीति में महत्व नहीं मिलता, ऐसा शशिकांत शिंदे ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस का एकीकरण हो जाता, लेकिन दुर्भाग्यवश अजितदादा अब हमारे बीच नहीं रहे। राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय को लेकर चर्चा हुई थी, यह सभी जानते हैं। यदि अजितदादा हमारे बीच होते, तो हाल ही में हुई जिला परिषद, पंचायत समिति, महानगरपालिका तथा स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की चुनावी तस्वीर अलग होती। इस दौरान शशिकांत शिंदे ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि सुनील तटकरे ने आज जो बयान दिया है, उसमें तथ्य है। 12 फरवरी को दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय की प्रक्रिया होने वाली थी, लेकिन महानगरपालिका चुनावों के कारण यह निर्णय टल गया था। शशिकांत शिंदे के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस के एकीकरण को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब आने वाले दिनों में दोनों दलों के विलय को लेकर क्या निर्णय होता है, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं।
