48 की हुईं मल्लिका शेरावत, रीमा लांबा से बॉलीवुड की ‘मल्लिका’ बनने तक का सफर

परिवार के विरोध के बावजूद चुनी अपनी राह, मां के सम्मान में अपनाया ‘शेरावत’ सरनेम

मुंबई। हिंदी सिनेमा में अपनी अलग और बेबाक पहचान बनाने वाली अभिनेत्री मल्लिका शेरावत का जन्म 24 अक्टूबर 1976 को हरियाणा में हुआ था। आज उनके जन्मदिन के मौके पर उनके फिल्मी सफर और उस फैसले की चर्चा जरूरी है, जिसने रीमा लांबा को बॉलीवुड की मल्लिका शेरावत बना दिया। मल्लिका शेरावत का असली नाम रीमा लांबा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ऐसे समय में की, जब उनका परिवार फिल्मी दुनिया के सख्त खिलाफ था। मल्लिका ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता नहीं चाहते थे कि वह फिल्मों में काम करें। उन्हें लगता था कि फिल्म इंडस्ट्री में जाने से परिवार की प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा। मल्लिका के मुताबिक, परिवार के विरोध ने उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ लाया। उन्होंने पिता का सरनेम इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया और अपनी मां से जुड़ा नाम अपनाया। उनका कहना था कि उनकी मां मुश्किल समय में चुपचाप उनके साथ खड़ी रहीं और उन्हें आगे बढ़ने का हौसला देती रहीं।
उन्होंने बताया था कि फिल्म इंडस्ट्री में उस समय ‘रीमा’ नाम की कई अभिनेत्रियां थीं, इसलिए वह ऐसा नाम चाहती थीं जो उन्हें अलग पहचान दे। उन्हें ‘मल्लिका’ नाम पसंद आया, जिसका अर्थ महारानी होता है। वहीं ‘शेरावत’ नाम उन्होंने अपनी मां के सम्मान में अपनाया। मल्लिका शेरावत ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत 2002 में आई ‘जीना सिर्फ मेरे लिए’ से की। इसके बाद 2003 में वह फिल्म ‘ख्वाहिश’ में मुख्य भूमिका में नजर आईं। हालांकि उन्हें देशभर में बड़ी पहचान 2004 में आई फिल्म ‘मर्डर’ से मिली। इमरान हाशमी के साथ ‘मर्डर’ में उनके बोल्ड किरदार की काफी चर्चा हुई। इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात सुर्खियों में ला दिया। इसके साथ ही उन्हें आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा, लेकिन मल्लिका ने अपने अंदाज और भूमिकाओं को लेकर कभी समझौता नहीं किया। हिंदी फिल्मों के अलावा मल्लिका ने अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में भी काम किया। वह जैकी चैन के साथ फिल्म ‘द मिथ’ में नजर आईं। इसके अलावा ‘प्यार के साइड इफेक्ट्स’, ‘वेलकम’ और ‘डबल धमाल’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनका करियर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा, लेकिन अपनी बोल्ड छवि, आत्मविश्वास और अलग स्क्रीन प्रेजेंस के कारण उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखी। मल्लिका शेरावत की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री के फिल्मी सफर की नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने और अपनी पहचान खुद गढ़ने की कहानी भी है।

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