डाकघरों में डिजिटल भुगतान से उपभोक्ताओं को परेशानी
रजिस्ट्री और स्पीड पोस्ट के लिए नकद भुगतान को लेकर असमंजस, बुजुर्ग और ग्रामीण अधिक प्रभावित

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन डाकघरों में रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट और अन्य सेवाओं के शुल्क भुगतान को लेकर कुछ उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि कई बार डाक सेवाओं के लिए नकद भुगतान के बजाय ऑनलाइन माध्यम से भुगतान करने को कहा जाता है। ऐसे में जिन लोगों के पास यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग या स्मार्टफोन की सुविधा नहीं है, उन्हें दूसरे लोगों की मदद लेनी पड़ती है। इससे विशेष रूप से बुजुर्ग, ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले नागरिक, किसान और ऐसे लोग प्रभावित होते हैं जो रोजमर्रा के लेनदेन में नकद रुपये का उपयोग करते हैं। डाकघरों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग सरकारी और निजी दस्तावेजों की रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट तथा जरूरी कागजात भेजने पहुंचते हैं। कई मामलों में दस्तावेज निर्धारित समयसीमा के भीतर न्यायालय, सरकारी विभाग, शैक्षणिक संस्थान या अन्य कार्यालयों तक भेजना जरूरी होता है। ऐसे में भुगतान में परेशानी होने से समय और काम दोनों प्रभावित हो सकते हैं। डिजिटल भुगतान से पारदर्शिता और सुविधा बढ़ती है, लेकिन सभी नागरिक अभी डिजिटल माध्यमों के उपयोग में समान रूप से सक्षम नहीं हैं। ऐसे में डाकघरों जैसी सार्वजनिक सेवाओं में भुगतान के सभी उपलब्ध विकल्पों की स्पष्ट जानकारी उपभोक्ताओं को देना आवश्यक है। यदि किसी सेवा में नकद भुगतान सीमित या अनुपलब्ध है, तो इससे जुड़े विभागीय नियम और निर्देश भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाने चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी न हो। उपभोक्ताओं का कहना है कि डाकघर कर्मचारियों को भुगतान के उपलब्ध विकल्पों की स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, जिससे विशेषकर बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों को भटकना न पड़े।
