लॉन्ड्री व्यवसायियों को बिजली बिल में 30 प्रतिशत सब्सिडी लागू करने की मांग
रजक महासंघ ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखा पत्र, पूरे महाराष्ट्र में शासनादेश का समान रूप से पालन कराने की अपील

हादी अली शैख
मुंबई। महाराष्ट्र में पारंपरिक लॉन्ड्री व्यवसाय से जुड़े रजक (धोबी) समाज के सामने बढ़ती आर्थिक चुनौतियों को लेकर रजक महासंघ ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हस्तक्षेप की मांग की है। महासंघ ने पत्र लिखकर कहा है कि लॉन्ड्री व्यवसायियों के लिए बिजली बिल में निर्धारित 30 प्रतिशत सब्सिडी के शासनादेश को पूरे राज्य में समान रूप से और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। रजक महासंघ के अध्यक्ष दशरथ कनौजिया की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि बड़ी संख्या में रजक परिवार दशकों से लॉन्ड्री व्यवसाय पर निर्भर हैं और बिजली इस काम का अनिवार्य हिस्सा है। बढ़ते बिजली बिल के कारण छोटे लॉन्ड्री व्यवसायियों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। महासंघ ने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2017 में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के प्रयासों से लॉन्ड्री व्यवसायियों को बिजली बिल में 30 प्रतिशत सब्सिडी देने का शासनादेश जारी किया गया था। महासंघ का कहना है कि इस निर्णय से हजारों परिवारों को राहत मिली थी, लेकिन बाद के वर्षों में राज्य के कई हिस्सों में इसका क्रियान्वयन समान रूप से नहीं हो रहा है। महासंघ का आरोप है कि कुछ बिजली वितरण कंपनियों और स्थानीय स्तर के अधिकारियों की उदासीनता के कारण पात्र लॉन्ड्री व्यवसायियों को सब्सिडी का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। इससे छोटे व्यवसायियों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। रजक महासंघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि राज्य की सभी सरकारी और निजी बिजली वितरण कंपनियों को शासनादेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही, आदेश के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था भी की जाए। महासंघ ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप कर पारंपरिक लॉन्ड्री व्यवसायियों को राहत दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
