फर्जी CC के आधार पर आठ मंजिला अवैध इमारत बनाने के आरोप में दो बिल्डर गिरफ्तार
‘धुरी हाइट्स-2’ मामले में 113 फ्लैट खरीदारों और सरकारी अधिकारियों से धोखाधड़ी का आरोप; विरार पुलिस ने दर्ज की FIR

पालघर। मीरा-भायंदर, वसई-विरार (MBVV) पुलिस आयुक्तालय की क्राइम डिटेक्शन ब्रांच यूनिट-2, वसई ने फर्जी निर्माण अनुमतियों के आधार पर कथित रूप से आठ मंजिला अवैध इमारत खड़ी करने के मामले में दो बिल्डरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, नालासोपारा पूर्व के जय साईराज संयुक्त नगर निवासी मुकेश शिवसागर उपाध्याय ने विरार पूर्व के नारंगी गांव स्थित सर्वे नंबर 131, हिस्सा नंबर 5 पर बनी ‘धुरी हाइट्स-2’ इमारत को लेकर शिकायत की थी। आरोप है कि यह इमारत ‘श्री कंस्ट्रक्शन’ द्वारा फर्जी दस्तावेजों और जाली कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (CC) के आधार पर बनाई गई। जांच में आरोप है कि बिल्डरों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय-6 में बिक्री विलेख पंजीकृत कराए और इस प्रक्रिया में 113 फ्लैट खरीदारों के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों को भी गुमराह किया। शिकायत पुलिस आयुक्त कार्यालय से क्राइम डिटेक्शन ब्रांच यूनिट-2, वसई को जांच के लिए भेजी गई थी। पुलिस ने वसई-विरार सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (VVMC) से निर्माण से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन किया। जांच के दौरान कथित धोखाधड़ी में श्री कंस्ट्रक्शन के मालिक कमलेश महादेव पाटिल और मामले के कथित मास्टरमाइंड विशाल विनायक पाटिल की भूमिका सामने आने का दावा किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बाद 19 अक्टूबर 2026 को विरार पुलिस स्टेशन में क्राइम रजिस्ट्रेशन नंबर 668/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 316(5), 318(4), 335, 338 और 3(5) के तहत आरोप दर्ज किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में कमलेश महादेव पाटिल (40), निवासी उत्तल आली, तलाव रोड, नारंगी, विरार पश्चिम और विशाल विनायक पाटिल (38), निवासी तलाव रोड, नारंगी, विरार पश्चिम शामिल हैं। दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 21 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया। पुलिस अब इस मामले में अन्य संभावित सहयोगियों, दस्तावेज तैयार करने या इस्तेमाल कराने वालों तथा कथित तौर पर अपराध में मदद करने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस ने ऐसे नागरिकों से भी सामने आने की अपील की है, जिन्होंने इस इमारत में फ्लैट खरीदे हों या जिनके साथ इसी तरह की धोखाधड़ी हुई हो। मामले की आगे की जांच जारी है।
