
अंतिम चयन सूची कॉलेज की वेबसाइट पर करनी होगी सार्वजनिक, गड़बड़ी मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
मुंबई। महाराष्ट्र के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों से संबद्ध गैर-सरकारी अनुदानित वरिष्ठ महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमबद्ध बनाने के लिए राज्य सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। अब भर्ती के दौरान पूरी इंटरव्यू प्रक्रिया की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की मंजूरी के बाद अंतिम चयन सूची संबंधित कॉलेज या संस्था की वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी।उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता और योग्यता को प्राथमिकता दी जाएगी। किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संस्था, महाविद्यालय या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था के मुताबिक, पदों पर भर्ती के लिए सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिलने के बाद संबंधित संस्था या कॉलेज को भर्ती विज्ञापन का मसौदा विश्वविद्यालय की मंजूरी के लिए भेजना होगा। विश्वविद्यालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि विज्ञापन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, सामाजिक आरक्षण और समांतर आरक्षण का सही उल्लेख किया गया है। इसकी जांच की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ की होगी।
भर्ती का विज्ञापन विश्वविद्यालय द्वारा मंजूर मसौदे के अनुसार ही प्रकाशित किया जाएगा। इसे राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्र के साथ महाराष्ट्र के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा घोषित ‘ए’ या ‘बी’ श्रेणी के राज्यस्तरीय समाचार पत्र में प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सभी संस्थाओं और कॉलेजों को उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करने होंगे। यदि कोई उम्मीदवार ऑफलाइन आवेदन करना चाहता है तो उसका आवेदन भी स्वीकार करना होगा। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन करने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को आवेदन प्राप्त होने की रसीद देना संस्था की जिम्मेदारी होगी। इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग यूजीसी की 18 जुलाई 2018 की अधिसूचना के Appendix-II के Table 3B के आधार पर की जाएगी। इस दौरान महाराष्ट्र शैक्षणिक संस्था (अध्यापक संवर्ग में आरक्षण) अधिनियम-2021 के साथ सामाजिक और समांतर आरक्षण नीति का भी पालन करना होगा। कॉलेज को शॉर्टलिस्टिंग में अपनाए गए मानदंड और इंटरव्यू के लिए चुने गए उम्मीदवारों की सूची अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी। इतना ही नहीं, आवेदन करने वाले सभी उम्मीदवारों की सूची और शॉर्टलिस्टिंग में उन्हें मिले अंक संबंधित विश्वविद्यालय को ऑनलाइन भेजना भी आवश्यक होगा। इंटरव्यू के लिए चयन समिति का गठन यूजीसी की 18 जुलाई 2018 की अधिसूचना और राज्य सरकार के 10 मई 2019 तथा 1 जनवरी 2024 के शासन निर्णयों के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। चयन समिति गठित करने की जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होगी। विश्वविद्यालय इंटरव्यू में अंक देने के मानदंड तय करेगा और उसी आधार पर मूल्यांकन पत्रक तैयार किया जाएगा। नई गाइडलाइन में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान इंटरव्यू की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को लेकर किया गया है। सहायक प्राध्यापक पद की पूरी इंटरव्यू प्रक्रिया रिकॉर्ड करनी होगी और रिकॉर्डिंग को इंटरव्यू की तारीख से कम से कम एक वर्ष तक गोपनीय दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखना होगा। यदि भर्ती को लेकर कोई शिकायत, आपत्ति, जांच, न्यायालयीन या वैधानिक कार्यवाही चल रही है तो रिकॉर्डिंग एक वर्ष बाद भी नष्ट नहीं की जा सकेगी। संबंधित मामले का अंतिम निपटारा होने तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। चयनित उम्मीदवारों की पात्रता और भर्ती प्रक्रिया नियमों के अनुरूप होने की जांच के बाद विश्वविद्यालय अंतिम चयन सूची को मंजूरी देगा। विश्वविद्यालय की मंजूरी मिलने के बाद चयनित उम्मीदवारों की अंतिम सूची संबंधित संस्था या महाविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी। मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने स्पष्ट किया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को यूजीसी की अधिसूचनाओं, उनमें समय-समय पर हुए संशोधनों और राज्य सरकार के शासन निर्णयों एवं परिपत्रों के अनुसार संचालित करना होगा। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था, विश्वविद्यालय, चयन समिति के सदस्यों और सरकारी प्रतिनिधियों की होगी। भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाएगी। वहीं, सहायक प्राध्यापक भर्ती में किसी तरह का गैरव्यवहार साबित होने पर संबंधित संस्था या महाविद्यालय के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

