SIR के खिलाफ राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, चुनाव आयोग से मांगा जवाब
मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को चुनौती, CJI सूर्यकांत ने कहा— न्यायपालिका को कोई दबाव में नहीं डाल सकता

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं की याचिका पर भारत निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से भी जवाब मांगा है। याचिका में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना पूर्व सूचना और सुनवाई का उचित अवसर दिए मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए। सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई के दौरान संबंधित याचिकाकर्ता से उसके आचरण के बारे में सवाल किया जाएगा। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा कथित SIR अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान उठा। इस पर सीजेआई ने स्पष्ट कहा, “कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता।” वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत में राजनीतिक जुलूस और उससे जुड़े घटनाक्रम पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि लगभग 200 वकीलों ने न्यायपालिका पर कथित दबाव बनाने के प्रयासों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ऐसी घटनाओं से अनजान नहीं है और वह ‘हाथीदांत की मीनार’ में बैठकर काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कमजोर प्रयासों पर अदालत ध्यान नहीं देती, हालांकि न्यायालय बाहर दिए जा रहे बयानों से भी अवगत है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने असदुद्दीन ओवैसी सहित विभिन्न नेताओं की ओर से निर्वाचन आयोग से संबंधित दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को भी नोटिस जारी किए। अदालत ने समान राहत की मांग करने वाली याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए रखने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, एनसीपी (शरद पवार) की नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत सहित अन्य विपक्षी नेता शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, यह याचिका 12 अक्टूबर को दाखिल की गई थी। शुरुआती प्रक्रियात्मक कमियां दूर होने के बाद 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसे पंजीकृत किया। याचिका में इस बात की न्यायिक जांच की मांग की गई है कि चुनाव आयोग द्वारा लिए गए संबंधित फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले वर्ष 2023 के कानून तथा ‘टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप हैं या नहीं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना नोटिस और सुनवाई का उचित अवसर दिए मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए। इसके साथ ही हटाए गए मतदाताओं की बूथवार सूची प्रकाशित करने, नाम हटाने के कारण स्पष्ट करने और संबंधित मतदाताओं के जनसांख्यिकीय विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश देने की भी मांग की गई है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की वैधता और याचिकाकर्ताओं की मांगों पर अंतिम निर्णय आना बाकी है।
