
नई दिल्ली। हरियाणा के गुरुग्राम जिले के शिकोहपुर, जिसे अब सेक्टर-83 के नाम से जाना जाता है, में हुए विवादित जमीन सौदे से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ अदालत में सीलबंद लिफाफे में स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाद्रा के खिलाफ चल रही जांच मुख्य रूप से इसी जमीन सौदे और उससे जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन पर केंद्रित है। मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा की अदालत को ईडी ने बताया कि इस प्रकरण में मैसर्स डीएलएफ की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है। अदालत ने अपने आदेश में ईडी की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच एजेंसी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है और डीएलएफ की भूमिका की भी आगे जांच की जा रही है। मामले में अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 21 अगस्त की तारीख निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान मामले के एक अन्य आरोपी केवल सिंह विर्क ने अदालत के समक्ष अपनी जमानत और जमानती बॉण्ड प्रस्तुत किए, जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही ईडी की जांच और अदालत की आगामी कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। इससे पहले रॉबर्ट वाद्रा ने मई में दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल अपनी वह याचिका बिना किसी शर्त के वापस ले ली थी, जिसमें उन्होंने विशेष अदालत द्वारा जारी समन के आदेश को चुनौती दी थी। इसके बाद उनके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया था। अदालत ने बीती 15 अप्रैल को रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दाखिल आरोप पत्र पर संज्ञान लिया था। बताया जा रहा है कि यह पहला अवसर है जब किसी जांच एजेंसी ने 57 वर्षीय रॉबर्ट वाद्रा के खिलाफ किसी आपराधिक मामले में चार्जशीट दाखिल की है। इससे पहले अप्रैल 2025 में ईडी ने इसी मामले को लेकर वाड्रा से लगातार तीन दिनों तक पूछताछ की थी। विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने मामले की सुनवाई के दौरान पहले कहा था कि आरोप पत्र और उससे संबंधित दस्तावेजों की प्रथम दृष्टया गहन जांच से रॉबर्ट वाड्रा और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार दिखाई देते हैं। अदालत ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 3, जो धनशोधन के अपराध से संबंधित है, और धारा 70, जो कंपनियों द्वारा किए गए अपराधों से संबंधित है, के तहत दर्ज मामलों का संज्ञान लिया है। ये अपराध पीएमएलए की धारा 4 के तहत दंडनीय हैं। शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़ा यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं में रहा है। अब ईडी द्वारा सीलबंद लिफाफे में स्थिति रिपोर्ट दाखिल किए जाने और डीएलएफ की भूमिका को लेकर आगे की जांच जारी होने की जानकारी सामने आने के बाद मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलकों का ध्यान आकर्षित किया है। फिलहाल ईडी मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संबंधित कंपनियों और अन्य आरोपियों की कथित भूमिका की जांच कर रही है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त की तारीख निर्धारित की है, जहां मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया की स्थिति पर सुनवाई होने की संभावना है।



