
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यस्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में दिए निर्देश; पीड़ितों को त्वरित न्याय सुनिश्चित करने पर बल
मुंबई। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम (एट्रोसिटी एक्ट) के तहत दर्ज मामलों में दोषसिद्धि (कन्विक्शन) की दर बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान भवन में आयोजित राज्यस्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि एट्रोसिटी मामलों की जांच और अभियोजन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके और दोषियों को सजा सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष कानूनों के तहत दर्ज मामलों में सरकारी वकीलों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन दोषसिद्धि के आधार पर किया जाए। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में भी आवश्यक कानूनी संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि विशेष कानूनों में समझौते की सीमित व्यवस्था रहे और गंभीर मामलों में आरोपी कानून का दुरुपयोग कर बच न सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जिलों में एट्रोसिटी के मामले अधिक दर्ज हो रहे हैं, वहां विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की जाएं, ताकि मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध दर्ज होने से लेकर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल होने तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एक मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार की जाए। इसके तहत कमजोर साक्ष्य, घटनाक्रम की कड़ी (चेन ऑफ इवेंट्स) और गवाहों के मुकरने जैसे कारणों का अध्ययन कर प्रभावी जांच प्रणाली विकसित की जाए। फडणवीस ने कहा कि एट्रोसिटी मामलों की जांच उपविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) स्तर के अधिकारी करते हैं। इसलिए राज्यभर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ऐसे अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही अदालतों में होने वाली सुनवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाए, जिससे गवाहों के मुकरने की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। मुख्यमंत्री ने सोलापुर, अहिल्यानगर, परभणी, नांदेड़ और यवतमाल जैसे जिलों में एट्रोसिटी मामलों की अधिक संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस विभाग को इन क्षेत्रों में अपराध बढ़ने के कारणों की गहन जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई शिकायत झूठी पाई जाती है तो जांच के बाद ही उचित निर्णय लिया जाए, जबकि वास्तविक मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने हत्या, बलात्कार और डकैती जैसे गंभीर मामलों में गवाहों की सुरक्षा के लिए प्रभावी ‘विटनेस प्रोटेक्शन प्रोग्राम’ लागू करने, जिला स्तर पर सरकारी वकीलों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा कानून से जुड़े सभी विभागों के अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एट्रोसिटी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में प्रत्येक छह माह में राज्यस्तरीय बैठक आयोजित की जाए। बैठक में सामाजिक न्याय विभाग के प्रधान सचिव डॉ. हर्षदीप कांबले ने कानून के क्रियान्वयन और विभिन्न योजनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। इस दौरान मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव (गृह) मनीषा म्हैसकर, पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते, प्रधान सचिव (विधि एवं न्याय) दिलीप घुमरे, सचिव (आदिवासी विकास) विजय वाघमारे, अपर पुलिस महानिदेशक (नागरिक अधिकार संरक्षण) अश्विती दोरजे, समाज कल्याण आयुक्त दीपा मुधोल सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
पीड़ितों को करोड़ों रुपये की आर्थिक सहायता
बैठक में बताया गया कि एट्रोसिटी अधिनियम के तहत वर्ष 2025-26 में 4,524 पीड़ितों को 53.57 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। वहीं वर्ष 2026-27 में अब तक 2,081 पीड़ितों को 27.40 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा, एट्रोसिटी मामलों के लिए संचालित हेल्पलाइन 14566 पर प्राप्त 282 शिकायतों का 1 जून 2026 तक निस्तारण किया जा चुका है।



