
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। नगर के बाईपास रोड स्थित एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर के निर्माण को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव त्रिवेदी ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत नगर पालिका परिषद से निर्माण कार्य से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगकर पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव त्रिवेदी ने नगर पालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत कर बाईपास रोड पर स्थापित एमआरएफ सेंटर के निर्माण एवं स्थापना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण अभिलेख उपलब्ध कराने की मांग की है। आरटीआई आवेदन में उन्होंने पूछा है कि एमआरएफ सेंटर का निर्माण किस योजना के अंतर्गत कराया गया, इसके लिए शासन का कौन-सा शासनादेश जारी हुआ तथा किस प्रशासनिक स्वीकृति के आधार पर परियोजना को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही निर्माण कार्य के लिए कितनी भूमि आवंटित की गई, इसका भी विवरण मांगा गया है।अधिवक्ता ने परियोजना की कुल लागत, कार्यादेश (वर्क ऑर्डर), निर्माण कार्य कराने वाले ठेकेदार का नाम, भुगतान का संपूर्ण विवरण, माप पुस्तिका (एमबी), गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट तथा निर्माण कार्य से संबंधित अन्य तकनीकी एवं वित्तीय अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की भी मांग की है। अधिवक्ता संजीव त्रिवेदी का कहना है कि सार्वजनिक धन से कराए जाने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना अत्यंत आवश्यक है। सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को सरकारी कार्यों और खर्च से संबंधित जानकारी प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करता है, इसलिए संबंधित विभाग को सभी अभिलेख निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपलब्ध कराने चाहिए। आरटीआई आवेदन दाखिल होने के बाद नगर में एमआरएफ सेंटर के निर्माण कार्य, उसकी लागत और प्रक्रिया को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब निगाहें नगर पालिका परिषद पर हैं कि वह अधिनियम के तहत निर्धारित अवधि में मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराती है या नहीं।



