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बीएमसी अधिकारियों व ओबेरॉय रियल्टी की मिलीभगत से जोगेश्वरी में ओबेरॉय मैक्सिमा परियोजना में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप, वरिष्ठ नागरिक ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की

मुंबई। जोगेश्वरी (पूर्व) स्थित जेवीएलआर में ओबेरॉय रियल्टी द्वारा विकसित ‘ओबेरॉय स्प्लेंडर’ और उससे जुड़ी ‘ओबेरॉय मैक्सिमा’ परियोजना को लेकर वरिष्ठ नागरिक एवं फ्लैट मालिक टी.एस.नटराजन ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी), संबंधित सरकारी अधिकारियों और बिल्डर पर विकास के नाम पर लगभग 1,500 करोड़ रुपये या उससे अधिक के घोटाले और व्यापक अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
टी.एस.नटराजन का आरोप है कि वर्ष 2005 से परियोजना के विकास में बड़े पैमाने पर विकास नियंत्रण नियमों (Development Control Rules) का उल्लंघन किया गया। उनका दावा है कि सीटीएस-1, वार्ड-74, जोगेश्वरी (पूर्व) स्थित ओबेरॉय मैक्सिमा परियोजना कथित रूप से अवैध तरीके से विकसित की गई है। उन्होंने कहा कि उनके पास इन आरोपों के समर्थन में “100 प्रतिशत सत्यापित एवं मापनीय दस्तावेजी साक्ष्य” मौजूद हैं और इन तथ्यों पर विस्तृत शोध-प्रबंध (थीसिस) भी तैयार किया जा सकता है।
नटराजन के अनुसार, उन्होंने अब तक सभी संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य बीएमसी, महाराष्ट्र सरकार के विभिन्न विभागों, जिला कलेक्टर, महारेरा, नगररचना विभाग तथा राज्य एवं केंद्र की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उपलब्ध कराए हैं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर प्रभावी जांच नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला केवल बिल्डर तक सीमित नहीं है, बल्कि बीएमसी के बिल्डिंग प्रपोजल (Building Proposal) और डेवलपमेंट प्लानिंग (Development Planning) विभागों से लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक फैले कथित संगठित भ्रष्टाचार का हिस्सा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन संभव नहीं हो सकता। नटराजन का दावा है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से बार-बार यह जवाब दिया जाता रहा कि परियोजना की सभी मंजूरियां तत्कालीन नियमों और महानगरपालिका आयुक्त की स्वीकृति के अनुरूप दी गई थीं। उनके अनुसार, इसी आधार पर आगे भी कथित रूप से अवैध मंजूरियां जारी की जाती रहीं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास मार्च 2026 तक के सभी दस्तावेज, बीएमसी के AutoDCR सिस्टम के लॉग और अन्य आधिकारिक अभिलेख उपलब्ध हैं, जिनसे मंजूरी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और रिकॉर्ड में किए गए फेरबदल का पता चलता है। उनका आरोप है कि इन कथित अनियमितताओं के कारण फ्लैट खरीदारों, आम नागरिकों और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ है।
वरिष्ठ नागरिक ने परियोजना में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि बिल्डर द्वारा स्वयं दाखिल किए गए शपथपत्रों में निर्धारित शर्तों का भी पालन नहीं किया गया। टी.एस.नटराजन ने बताया कि पिछले 13 वर्षों से वे विभिन्न सरकारी पोर्टलों और संबंधित एजेंसियों के माध्यम से लगातार शिकायतें दर्ज कराते रहे हैं, लेकिन अधिकांश शिकायतें अंततः उसी विभाग को भेज दी जाती हैं जिसके विरुद्ध आरोप लगाए गए हैं। उनके अनुसार, इससे निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की संभावना प्रभावित होती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, स्थानीय सांसद, विधायक तथा विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों से भी मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि अब तक किसी भी स्तर पर बिल्डर के विरुद्ध ठोस कार्रवाई होती दिखाई नहीं दी है। वहीं, इस पूरे मामले में बीएमसी के संबंधित अधिकारी फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले में संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आना शेष है।

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