कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे लाइन के किनारे अवैध झुग्गियां हटाने को हाई कोर्ट की मंजूरी, बेदखली से पहले 30 दिन का नोटिस अनिवार्य
प्रभावित परिवारों को छह महीने तक प्रति माह 2,000 रुपये की सहायता, पात्र लोगों के पुनर्वास की संभावनाएं तलाशने का निर्देश

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सेंट्रल रेलवे को कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे लाइन के किनारे रेलवे के सुरक्षा क्षेत्र में बनी अनधिकृत झुग्गियों और झोपड़ियों को हटाने की अनुमति दे दी है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई शुरू करने से पहले रेलवे प्रशासन को नए बेदखली नोटिस जारी करने होंगे और संबंधित निवासियों को जगह खाली करने के लिए 30 दिनों का समय देना होगा। इसके साथ ही अदालत ने प्रभावित परिवारों का रिकॉर्ड तैयार करने, सीमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और सरकारी योजनाओं के तहत पात्र परिवारों के पुनर्वास की संभावनाएं तलाशने के भी निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति भारती डांगरे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कुर्ला पूर्व स्थित राजीव गांधी नगर के सात निवासियों की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने रेलवे की जमीन पर बने उनके ढांचों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी। अदालत ने पाया कि संबंधित झुग्गियां रेलवे पटरियों के किनारे निर्धारित 10 मीटर के बफर और सुरक्षा क्षेत्र में स्थित हैं। ऐसे अनधिकृत निर्माण रेलवे के संचालन और बुनियादी ढांचे के विकास में बाधा उत्पन्न करने के साथ वहां रहने वाले लोगों तथा रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं। सेंट्रल रेलवे की ओर से अदालत में कहा गया कि कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे लाइन के किनारे बने अनधिकृत ढांचे रेलवे की विकास परियोजनाओं में बाधा डाल रहे हैं। रेलवे प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी इन निर्माणों को हटाना आवश्यक बताया। अदालत ने कहा कि रेलवे की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त रखना रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसके लिए केवल स्थानीय अधिकारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने इस तथ्य का भी संज्ञान लिया कि सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत शुरू की गई बेदखली संबंधी कार्यवाही वर्ष 2022 में पूरी हो चुकी थी। इसके बावजूद पीठ ने रेलवे प्रशासन को निर्देश दिया कि अगली कार्रवाई से पहले संबंधित निवासियों को नए नोटिस जारी किए जाएं। नोटिस मिलने के बाद निवासियों को 30 दिनों के भीतर जगह खाली करने का अवसर दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में जगह खाली नहीं करने की स्थिति में रेलवे प्रशासन बेदखली और अनधिकृत ढांचों को हटाने की कार्रवाई कर सकेगा। हाई कोर्ट ने कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। संबंधित पुलिस आयुक्त अथवा पुलिस अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहे, ताकि पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। अदालत ने रेलवे की सुरक्षा आवश्यकताओं के साथ प्रभावित परिवारों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा है। मुंबई उपनगर जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू होने से पहले संबंधित झुग्गियों में रहने वाले परिवारों की पहचान कर उनका विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इसमें प्रभावित परिवारों की संख्या और उनकी परिस्थितियों का विवरण दर्ज किया जाएगा, ताकि सरकारी योजनाओं के तहत सहायता एवं पुनर्वास की पात्रता का आकलन किया जा सके। अदालत ने हटाए जाने वाले प्रत्येक ढांचे के लिए छह महीने तक 2,000 रुपये प्रतिमाह की अनुग्रह सहायता देने का भी आदेश दिया है। इस आर्थिक सहायता का खर्च रेलवे प्रशासन और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के बीच साझा किया जाएगा। अदालत के निर्देश के अनुसार, यह सहायता प्रभावित निवासियों को बेदखली के बाद सीमित आर्थिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से दी जाएगी। पुनर्वास के मुद्दे पर हाई कोर्ट ने मुंबई उपनगर जिलाधिकारी और झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (एसआरए) को निर्देश दिया है कि वे लागू सरकारी आवास योजनाओं के तहत पात्र परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास की संभावनाओं का परीक्षण करें। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। अदालत ने इस प्रक्रिया को छह महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि बेदखली का सामना कर रहे निवासी उसी स्थान पर वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की मांग नहीं कर सकते, जहां से उनके अनधिकृत निर्माण हटाए जा रहे हैं। पात्र परिवारों के लिए पुनर्वास के विकल्प तलाशने की प्रक्रिया रेलवे की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई से अलग होगी।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे लाइन के किनारे स्थित अनधिकृत झुग्गियों को हटाने का रास्ता साफ हो गया है।
