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‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ से राज्य में साक्षरता आंदोलन को मिलेगी नई दिशा: प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल

मुंबई। राज्य के निरक्षर नागरिकों को साक्षरता की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र प्रायोजित ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ एक प्रभावी माध्यम साबित होगा। इस अभियान के जरिए महाराष्ट्र में साक्षरता आंदोलन को नई दिशा मिलेगी, ऐसा विश्वास स्कूल शिक्षा एवं खेल विभाग के प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल ने व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 12.40 लाख नागरिकों को साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं को समन्वय के साथ कार्य करना होगा। शुक्रवार को मंत्रालय में आयोजित एक समीक्षा बैठक में, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई थी, प्रधान सचिव देओल ने कहा कि साक्षरता अभियान में स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचारपूर्ण गतिविधियों के माध्यम से “कोई भी व्यक्ति निरक्षर न रहे” इस उद्देश्य के साथ व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए। बैठक में शिक्षा आयुक्त सच्चिंद्रप्रताप सिंह, महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष श्री कुलकर्णी, शिक्षा संचालनालय (योजना) के संचालक कृष्णकुमार पाटील तथा अन्य अधिकारी भी शामिल हुए। देओल ने कहा कि साक्षरता अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वयंसेवकों, नवसाक्षरों और निरक्षर व्यक्तियों का सम्मान करने, जिला स्तर पर किए गए नवाचारों, सफलता की कहानियों और अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए ‘उल्लास मेला’ एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। इससे साक्षरता आंदोलन को जनभागीदारी और नई ऊर्जा मिलती है। राज्य में साक्षरता अभियान को अधिक व्यापक जनसमर्थन दिलाने, स्वयंसेवकों को प्रोत्साहित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर वर्ष ‘उल्लास मेला’ आयोजित करने के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। बैठक में राज्य साक्षरता अभियान प्राधिकरण और राज्य साक्षरता केंद्र द्वारा तैयार किए जाने वाले वार्षिक कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महाराष्ट्र को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाएं। इसके लिए देश के पूर्ण साक्षर राज्यों की कार्यप्रणाली, सफल योजनाओं और मॉडल्स का अध्ययन कर उनकी प्रभावी व्यवस्थाओं को महाराष्ट्र में लागू करने पर भी विचार किया गया। साथ ही, साक्षरता अभियान को अधिक प्रभावशाली और परिणामोन्मुख बनाने के लिए सर्वोत्तम पद्धतियों को अपनाने के निर्देश दिए गए।

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