
मुंबई। महाराष्ट्र के मत्स्य व्यवसाय एवं बंदर विकास मंत्री नितेश राणे ने मत्स्य व्यवसाय क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाए तथा विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को गति दी जाए। सोमवार को मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मत्स्य व्यवसाय क्षेत्र से संबंधित विकास परियोजनाओं, कल्याणकारी योजनाओं और उनकी प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। बैठक में विभागीय सचिव एन. रामास्वामी, मत्स्य आयुक्त प्रेरणा देशब्रतर तथा महाराष्ट्र मत्स्योद्योग विकास महामंडल के अधिकारी उपस्थित रहे।
मत्स्य बाजार, झींगा संवर्धन और तटीय ढांचे के विकास पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री मत्स्यसंपदा योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना, अंतरराज्यीय अध्ययन दौरे, आधुनिक मत्स्य बाजारों का निर्माण, खारे पानी में सुपर-इंटेंसिव झींगा संवर्धन, समुद्री शैवाल बीज उत्पादन केंद्रों की स्थापना तथा मछली उतारने के केंद्रों, बंदरगाहों और जेट्टियों की मरम्मत एवं विकास से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा की गई। जून से सितंबर 2025 के दौरान हुई अतिवृष्टि से प्रभावित मत्स्य व्यवसाय क्षेत्र के लिए घोषित विशेष राहत पैकेज के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। मंत्री नितेश राणे ने अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
ड्रोन निगरानी, ‘सागर मित्र’ योजना और मछुआरों के कल्याण पर विशेष फोकस
बैठक में मछुआरा समुदाय के लिए पर्यावरणीय जलजनक प्रौद्योगिकी आधारित पायलट परियोजना, महाराष्ट्र समुद्री एवं अंतर्देशीय मत्स्य कल्याण महामंडल की स्थापना, समुद्री मत्स्य पालन नियमन कानून के प्रभावी पालन हेतु ड्रोन खरीद, बंदी अवधि में सक्रिय मछुआरों को आर्थिक सहायता तथा विभिन्न मत्स्य संवर्धन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्री राणे ने ‘ड्रोन आधारित निगरानी एवं डिजिटल डेटा प्रबंधन परियोजना’ के अंतर्गत एक सप्ताह के भीतर उपयोगकर्ता-अनुकूल और पारदर्शी डैशबोर्ड विकसित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा तटीय क्षेत्र के 91 संवेदनशील लैंडिंग पॉइंट्स पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा प्रधानमंत्री मत्स्यसंपदा योजना के अंतर्गत ‘सागर मित्र’ नियुक्ति प्रक्रिया का भी आकलन किया गया। उन्होंने अन्य राज्यों की कार्यप्रणाली का अध्ययन कर आठ दिनों के भीतर विस्तृत प्रस्तुतीकरण तैयार करने तथा महाराष्ट्र में मछुआरों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।



