महाराष्ट्र में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: टेली-मानस हेल्पलाइन पर 3.27 लाख से अधिक कॉल
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर ‘मनजागृति’ और ‘मनसंवाद’ अभियान से जागरूकता पर जोर, स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर बोले— समय पर उपचार और परामर्श मिलना जरूरी

मुंबई। महाराष्ट्र में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नागरिकों को समय पर परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही है। टेली-मानस हेल्पलाइन, मनशक्ति क्लिनिक, स्मृतिदोष क्लिनिक और मनोसामाजिक पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क मजबूत किया जा रहा है। यह जानकारी राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने दी। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति समाज का दृष्टिकोण बदलना आवश्यक है। लोगों को अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बातचीत करने, समय पर सहायता लेने और जरूरतमंद व्यक्तियों को सहयोग देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
इस वर्ष राज्य में ‘मनजागृति’ और ‘मनसंवाद’ के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस वर्ष की वैश्विक संकल्पना मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का प्रत्यक्ष अनुभव रखने वाले व्यक्तियों की बात सुनकर सकारात्मक बदलाव लाने पर केंद्रित है। ऐसे व्यक्तियों के अनुभवों को स्वास्थ्य सेवाओं और निर्णय प्रक्रिया में भी महत्व दिए जाने की आवश्यकता बताई गई है।
टेली-मानस हेल्पलाइन पर 3.27 लाख से अधिक कॉल
मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 चौबीसों घंटे संचालित की जा रही है। महाराष्ट्र में वर्ष 2022-23 से अप्रैल 2026 तक इस हेल्पलाइन पर 3 लाख 27 हजार से अधिक कॉल प्राप्त हुए हैं। इस सेवा के माध्यम से नागरिक घर बैठे फोन पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी मानसिक स्वास्थ्य उपचार
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं नागरिकों के घरों के नजदीक उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर मनशक्ति क्लिनिक के माध्यम से सेवाएं प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। इन केंद्रों पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान, परामर्श, उपचार और आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के लिए मरीजों को रेफर करने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे व्यक्तियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
स्मृतिदोष क्लिनिक से हर साल 45 हजार से अधिक नागरिकों को लाभ
बढ़ती उम्र के साथ होने वाली स्मरणशक्ति संबंधी समस्याओं की पहचान और उपचार के लिए राज्य में विशेष स्मृतिदोष क्लिनिक संचालित किए जा रहे हैं। इन क्लिनिकों की बाह्य रोगी सेवाओं से हर वर्ष लगभग 45 हजार से अधिक नागरिक लाभान्वित होते हैं। विशेष रूप से स्मरणशक्ति संबंधी समस्याओं से जूझ रहे वरिष्ठ नागरिकों और उनके परिवारों को चिकित्सकीय मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से बढ़ेगी जागरूकता
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग ले रही है। आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट, एकलव्य फाउंडेशन और श्रद्धा फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के माध्यम से जागरूकता, परामर्श और सामुदायिक स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मचारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के बीच समन्वय स्थापित कर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है।
‘मनसंवाद’ से दूर होगा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा सामाजिक कलंक
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर समाज में व्याप्त गलत धारणाओं और सामाजिक कलंक को दूर करना समय की आवश्यकता है। ‘मनजागृति’ के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव रखने वाले व्यक्तियों की बात संवेदनशीलता से सुनने और ‘मनसंवाद— बोलें, सुनें और समझें’ के माध्यम से खुलकर संवाद करने का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों के अधिकारों, सम्मान और गोपनीयता की रक्षा करना आवश्यक है। आबिटकर ने नागरिकों से अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज न करें, जरूरत पड़ने पर समय पर विशेषज्ञ सहायता लें और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक, संवेदनशील तथा भेदभावमुक्त समाज के निर्माण में योगदान दें। मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन: 14416 (24 घंटे उपलब्ध)।
