Wednesday, May 27, 2026
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महाराष्ट्र को सूखा मुक्त बनाने के लिए केंद्र-राज्य सरकार के बीच बड़ी बैठक: जल संरक्षण और सिंचाई परियोजनाओं को मिलेगी गति

नई दिल्ली। महाराष्ट्र को सूखा मुक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार ने जल संरक्षण, सिंचाई और पेयजल योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि जलजीवन मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और जलसंचय-जनभागीदारी जैसे अभियानों को तेजी से लागू कर राज्य को दीर्घकालीन जल संकट से बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। बुधवार को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित पंडित दीनदयाल अंत्योदय भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में महाराष्ट्र की विभिन्न जल परियोजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, मंत्री गिरीश महाजन, मंत्री गुलाबराव पाटिल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
जलजीवन मिशन के लिए 6,800 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि राज्य में 75 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो चुकी तथा 50 से 75 प्रतिशत प्रगति वाली जलजीवन मिशन योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर वित्तीय सहायता देने को लेकर केंद्र सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि पाइपलाइन और पेयजल अधोसंरचना परियोजनाओं को गति देने के लिए महाराष्ट्र को लगभग 6,800 करोड़ रुपये की सहायता मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी का “हर घर जल” सपना महाराष्ट्र पूरी गंभीरता से पूरा करेगा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि देश के लगभग 40 प्रतिशत बांध महाराष्ट्र में होने के बावजूद राज्य का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा आज भी सूखा प्रभावित है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और जनभागीदारी ही इसका स्थायी समाधान है। इसी उद्देश्य से ‘जलयुक्त शिवार’ और ‘जलतारा’ जैसे अभियानों को और व्यापक बनाया जाएगा।
नदी जोड़ परियोजनाओं को प्राथमिकता
बैठक में राज्य के भीतर नदी जोड़ परियोजनाओं को प्राथमिकता देने पर भी सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैनगंगा-नलगंगा नदी जोड़ परियोजना तथा पश्चिमवाहिनी नदियों का पानी मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र की ओर मोड़ने की योजना पूरी होने पर राज्य का बड़ा सूखा प्रभावित क्षेत्र राहत पा सकता है। उन्होंने बताया कि वैनगंगा-नलगंगा परियोजना के तहत समुद्र में बह जाने वाले 100 टीएमसी पानी में से 62 टीएमसी पानी उपयोग में लाने की योजना है।
‘जलतारा’ मॉडल की केंद्रीय मंत्री ने की सराहना
केंद्रीय मंत्री सी आर पाटिल ने महाराष्ट्र की ‘जलतारा’ योजना की सराहना करते हुए कहा कि केवल 4 से 5 हजार रुपये की लागत वाले छोटे जल संरचनाओं से एक एकड़ भूमि में 3 से 4 लाख लीटर पानी जमीन में समाहित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2024 से शुरू हुए अभियान में 10 लाख संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक 27.50 लाख संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं। साथ ही 2026 तक 1 करोड़ संरचनाओं का लक्ष्य रखा गया था, जबकि अभी तक 1.26 करोड़ कार्य पूरे हो चुके हैं।
मनरेगा निधि से जल संरक्षण को बढ़ावा
बैठक में यह भी बताया गया कि डार्क जोन क्षेत्रों में मनरेगा निधि का 65 प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण कार्यों पर खर्च किया जाएगा। सेमी-क्रिटिकल क्षेत्रों को 40 से 45 प्रतिशत, जबकि अन्य क्षेत्रों को 30 प्रतिशत निधि उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्रीय मंत्री पाटील ने कहा कि “हर घर जल” योजना से महिलाओं को सबसे अधिक राहत मिली है। पहले महिलाओं का काफी समय पानी लाने में खर्च होता था, लेकिन अब घर-घर स्वच्छ पानी पहुंचने से स्वास्थ्य में सुधार और खर्च में कमी आई है। बैठक में भूजल पुनर्भरण, मेगा रिचार्ज परियोजनाओं और जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया।

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