विधिमंडल में दिए आश्वासनों की पूर्ति के लिए विभाग चलाएं विशेष अभियान: मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल
लंबित प्रश्नों के जवाब समय पर देने और जनप्रतिनिधियों के पत्रों पर अंतरिम या अंतिम उत्तर सुनिश्चित करने के निर्देश

मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को सभी विभागों से कहा है कि विधिमंडल में दिए गए आश्वासनों की पूर्ति और लंबित प्रश्नों के जवाब देने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ समयबद्ध कार्रवाई करने और जनप्रतिनिधियों के पत्रों का अंतिम अथवा अंतरिम उत्तर सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मुख्य सचिव ने कहा कि विधिमंडल का सम्मान बनाए रखते हुए प्रशासन की जवाबदेही को और मजबूत करना सभी विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रश्नों के उत्तर समय पर देना, आश्वासनों की नियमित समीक्षा करना और सदन से संबंधित कार्यवाही के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है। अग्रवाल ने कहा कि यदि किसी प्रश्न का उत्तर देने के लिए दूसरे विभाग से जानकारी की जरूरत हो, तो संबंधित विभाग सीधे संवाद कर समन्वय स्थापित करें। केवल यह तय करने में समय न गंवाया जाए कि प्रश्न किस विभाग से संबंधित है, बल्कि जवाब देने की जिम्मेदारी स्वीकार कर आवश्यक जानकारी जुटाई जाए। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ स्तर पर चर्चा और बैठकों के माध्यम से अड़चनों का समाधान कर उत्तर समय पर प्रस्तुत करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। संसदीय कार्य विभाग की ओर से मंत्रालय में ‘लंबित आश्वासनों की पूर्ति’ विषय पर मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विधिमंडल सचिवालय के संयुक्त सचिव नागनाथ थिटे ने अधिकारियों का मार्गदर्शन किया। थिटे ने कहा कि विधिमंडल के सदन में दिए गए आश्वासन कभी समाप्त नहीं होते। इसलिए संबंधित विभागों को लंबित आश्वासनों की पूर्ति के लिए लगातार पहल और फॉलो-अप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए उनके समाधान के लिए विभागीय समन्वय बेहद जरूरी है। कार्यक्रम में विधिमंडल सचिवालय के सचिव-1 जितेंद्र भोळे, संसदीय कार्य विभाग की सचिव सुप्रिया धावरे, संयुक्त सचिव प्रभाकर पवार सहित वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न मंत्रालयीन विभागों के विधिमंडल कार्य समन्वय अधिकारी मौजूद रहे।
