दक्षिण मुंबई साफ होने से पूरी मुंबई साफ नहीं हो जाती: बॉम्बे हाई कोर्ट ने BMC को लगाई फटकार
जोगेश्वरी-मलाड समेत पश्चिमी उपनगरों में गंदगी पर नाराजगी, 24 वार्डों की सफाई व्यवस्था पर मांगा हलफनामा

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को मुंबई में कचरा और सफाई व्यवस्था को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल वर्ली, नरीमन पॉइंट और दक्षिण मुंबई के कुछ हिस्सों का साफ-सुथरा होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि पूरा शहर साफ है। अदालत ने विशेष रूप से पश्चिमी उपनगरों में फैली गंदगी और खुले में कचरा फेंके जाने की स्थिति पर चिंता जताई। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि पिछले सप्ताह उत्तन जाते समय उन्होंने खुद पश्चिमी उपनगरों से गुजरते हुए सड़कों, फुटपाथों, खुले स्थानों और पहाड़ी ढलानों पर कचरा पड़ा देखा। अदालत ने जोगेश्वरी और मलाड की स्थिति को विशेष रूप से खराब बताया। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों की जिंदगी, स्वास्थ्य और स्वच्छता उसकी चिंता का विषय है और शहर के स्वास्थ्य मानकों में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंके जाने की समस्या स्थानीय स्तर की है और सभी वार्डों को साफ रखना नगर निगम की जिम्मेदारी है। खंडपीठ ने BMC को निर्देश दिया कि वह मुंबई के सभी 24 वार्डों में कचरा फेंकने से रोकने, स्वास्थ्य और स्वच्छता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का वार्डवार ब्यौरा देते हुए हलफनामा दाखिल करे। कोर्ट ने वार्ड अधिकारियों की भूमिका और जमीनी स्तर पर की जा रही कार्रवाई की भी जानकारी मांगी है। अदालत ने KEM अस्पताल सहित अन्य महानगरपालिका और सरकारी अस्पतालों से डेंगू, मलेरिया, H1N1 और अन्य संक्रामक बीमारियों से जुड़े मरीजों का डेटा भी मांगा है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि 2 अक्टूबर, गांधी जयंती पर स्वच्छता अभियान के तहत BMC ने क्या-क्या कदम उठाए थे। यह मामला मूल रूप से कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया था, लेकिन हाई कोर्ट ने इसका दायरा बढ़ाते हुए अब पूरे मुंबई शहर की स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी करने का फैसला किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी। तब तक BMC को वार्डवार सफाई व्यवस्था और अस्पतालों से संबंधित मांगी गई जानकारी अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।
